आचार संहिता हटते ही अब मध्यप्रदेश में फिर होगी तबादलों की बारिश

भोपाल। लोकसभा चुनाव हो गए हैं। अब मुख्यमंत्री कमलनाथ मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर पर नए सिरे से जमावट करेंगे। इसकी शुरुआत इसी हफ्ते मंत्रालय से हो सकती है। इसमें कृषि विभाग की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से नए अधिकारी को सौंपी जा सकती है। इसके लिए प्रमुख सचिव सहकारिता अजीत केसरी का नाम चर्चा में है। वहीं, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में पदस्थ पंकज अग्रवाल की मुख्यधारा में वापसी के आसार भी हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में बदलाव प्रस्तावित है। हालांकि, यहां के लिए अभी किसी अधिकारी का नाम तय नहीं है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री का पूरा फोकस प्रशासनिक कसावट और डिलीवरी पर है।

मंत्रालय और मैदानी स्तर पर कुछ बदलाव काफी समय से प्रस्तावित हैं। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने के कारण यह काम ठंडे बस्ते में था। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. राजेश कुमार राजौरा को उद्योग विभाग का अतिरिक्त प्रभाग दिया गया है।

सरकार की मंशा उन्हें अब कृषि विभाग से निकालकर उद्योग विभाग में ही पूरी तरह जमाने की है। दरअसल, उद्योग मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाला विभाग है। सरकार इसके भरोसे ही प्रदेश में रोजगार के अवसर पैदा करना चाहती है। इसके लिए मुख्यमंत्री मौजूदा उद्योग प्रोत्साहन योजनाओं में संशोधन के निर्देश भी दे चुके हैं। वहीं, कृषि विभाग कर्जमाफी जैसी बड़ी योजना का क्रियान्वयन कर रहा है।

इसके लिए पूर्णकालिक अधिकारी की जरूरत होगी। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव अजीत केसरी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। वहीं, प्रमुख सचिव पंकज अग्रवाल की मुख्यधारा में वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा ऊर्जा विभाग में बदलाव के संकेत चुनाव के दौरान ही दिए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में भी बदलाव प्रस्तावित है। गेहूं खरीदी की परेशानियों के मद्देनजर प्रमुख सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति नीलम शमी राव को बदले जाने की चर्चा है।

सामान्य प्रशासन विभाग का प्रभार अभी अपर मुख्य सचिव पीसी मीना के पास है। यहां स्थाई व्यवस्था की जा सकती है। इसके अलावा मैदानी स्तर पर कुछ कमिश्नर और कलेक्टरों के तबादले भी किए जाने हैं। शहडोल में ललित कुमार दाहिमा की वापसी हो सकती है। दाहिमा को मंत्री ओमकार सिंह मरकाम के देर रात कलेक्टोरेट पहुंचने की वजह से चुनाव आयोग के निर्देश पर हटाना पड़ा था। यह कार्रवाई शहडोल कमिश्नर शोभित जैन की रिपोर्ट के आधार पर हुई थी। उधर, कुछ अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की कोशिश में भी लगे हैं।

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