7 साल बाद देवभूमि उत्तराखंड पर हादसे की पुनरावृत्ति, 170 लोगों के लापता होने की आशंका, 16 को जिंदा बचाया

उत्तराखंड में रविवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बहुत बड़ा हादसा हुआ। राज्य के चमोली जिले के तपोवन में ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा नदी में गिरा। इससे बेतहाशा बाढ़ के हालात पैदा हो गए और धौलीगंगा पर बन रहा बांध बह गया। तपोवन में एक प्राइवेट पावर कंपनी के ऋषिगंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट और सरकारी कंपनी NTPC के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। आपदा में सबसे ज्यादा नुकसान यहीं हुआ।

ITBP के अनुसार, ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में काम कर रहे 15 से 20 मजदूर लापता हैं। इसके साथ ही NTPC प्रोजेक्ट पर करीब 150 मजदूरों की मौत की आशंका है। प्रोजेक्ट साइट से रात आठ बजे तक बजे तक 8 शव बरामद किए गए। इसकी पुष्टि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी की। उत्तराखंड सरकार के अनुसार, अब तक 25 लोग रेस्क्यू किये जा चुके हैं, जिनमें 12 तपोवन से और 13 रैणी से हैं।

हादसे के बाद 125 लोग लापता
रावत के मुताबिक, हादसे के बाद कुल 125 लोग लापता हैं। रावत ने बताया कि ऋषिगंगा प्रोजेक्ट में चार पुलिसकर्मियों समेत 39 लोग लापता हैं। यहां से 5 किलोमीटर दूर NTPC के प्रोजेक्ट का काम चल रहा था। यहां 176 मजदूर ड्यूटी के लिए निकले थे। यहां दो टनल हैं। एक टनल से 16 लोगों को निकाल लिया गया है। दूसरे टनल में कितने लोग हैं इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है।

रात में जारी रहेगा रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद NDRF और ADIRF की टीमें मौके पर पहुंच कर बचाव कार्य कर रही हैं। ITBP के PRO विवेक पांडे के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन रात में भी जारी रहेगा। इधर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रावत ने मरने वालों के परिवार को 4 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड से भी 2 लाख रुपए दिए जाएंगे। घायलों को 50 हजार रुपए की मदद दी जाएगी।

गंगा किनारे के इलाकों में दहशत
ग्लेशियर टूटने से धौली नदी ने विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते नदी ने रास्ते में आने वाले हर अवरोध को पाटना शुरू कर दिया। ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट साइट तक पहुंचते-पहुंचते नदी इतनी विकराल हो गई कि उसने पूरे बांध को ही बहा दिया। मौके पर मौजूद तमाम मशीनरी और लोग इसकी चपेट में आ गए। राहत की बात यह है कि पीपल कोटी से चमोली के बीच में अलकनंदा नदी का जलस्तर तो बढ़ा है, लेकिन नदी का क्षेत्र चौड़ा होने से बहाव सामान्य हो गया है।

हादसे को देखते हुए प्रशासन ने हरिद्वार तक अलर्ट जारी किया। टिहरी बांध से भागीरथी में पानी का डिस्चार्ज बंद किया गया। हादसे के बाद से अलकनंदा और गंगा से किनारे के इलाकों में दहशत है। ऋषिकेश में राफ्टिंग और नावों पर रोक लगा दी गई है। यही नहीं, श्रीनगर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के बांध को भी खाली कर दिया गया है, ताकि पीछे से पानी बढ़ने पर बांध का जलस्तर न बढ़े। इधर, ग्लेशियोलॉजिस्ट की दो टीमें बाढ़ के कारणों के अध्ययन के लिए सोमवार को तपोवन जाएंगी।

फोटो तपोवन डैम की है, जहां धौलीगंगा का जल स्तर बढ़ने के बाद काफी नुकसान पहुंचा है।
फोटो तपोवन डैम की है, जहां धौलीगंगा का जल स्तर बढ़ने के बाद काफी नुकसान पहुंचा है।

उत्तराखंड की आपदा कब आई, कैसे आई और कितना नुकसान हुआ, 5 पॉइंट में समझें…

1. ऋषिगंगा और धौलीगंगा में जल स्तर बढ़ा
चमोली के तपोवन इलाके में सुबह करीब साढ़े 10 बजे ग्लेशियर टूटकर ऋषिगंगा में गिर गया। इससे नदी का जल स्तर बढ़ गया। यही नदी रैणी गांव में जाकर धौलीगंगा से मिलती है इसीलिए उसका जल स्तर भी बढ़ गया। नदियों के किनारे बसे घर बह गए। इसके बाद आसपास के गांवों को खाली कराया गया।

2. ऋषिगंगा और NTPC का प्रोजेक्ट तबाह
ऋषिगंगा नदी के किनारे स्थित रैणी गांव में ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट पड़ता है। यह प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया है। यहां से करीब 15-20 मजदूर लापता हैं। यहीं पर जोशीमठ मलारिया हाईवे पर बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन का बनाया ब्रिज भी टूट गया। यहीं पर 6 चरवाहे और उनके मवेशी पानी में बह गए। यहां रेस्क्यू टीमें पहुंच चुकी हैं। ऋषिगंगा का पानी जहां धौलीगंगा से मिलता है, वहां भी जल स्तर बढ़ गया। पानी NTPC प्रोजेक्ट में घुस गया। इस वजह से गांव को जोड़ने वाले दो झूला ब्रिज बह गए। NTPC प्रोजेक्ट में काम करने वाले करीब 150 मजदूरों की जान जाने की आशंका है।

3. अब तक 10 शव बरामद किए गए
यहां अब तक 10 शव बरामद किए गए हैं। NTPC की सुरंग से 16 मजदूरों को बचाया गया है। रेस्क्यू टीमें लगातार ऑपरेशन चला रही हैं।

4. रेस्क्यू में लगी आर्मी और एयरफोर्स
SDRF, NDRF, ITBP के अलावा आर्मी ने भी अपने 600 जवान चमोली भेजे हैं। इसके अलावा वायुसेना ने Mi-17 और ध्रुव समेत तीन हेलिकॉप्टर रेस्क्यू मिशन पर भेजे हैं। वायुसेना ने कहा कि जरूरत पड़ने पर और एयरक्राफ्ट भेजे जाएंगे।

5. क्या खतरा अब भी है?
उत्तराखंड पुलिस के मुताबिक, श्रीनगर, ऋषिकेश और हरिद्वार में पानी का स्तर खतरे के निशान से ऊपर जा सकता है। उत्तर प्रदेश में गंगा के किनारे बसे शहरों में अलर्ट जारी किया गया है। बिजनौर, कन्नौज, फतेहगढ़, प्रयागराज, कानपुर, मिर्जापुर, गढ़मुक्तेश्वर, गाजीपुर और वाराणसी जैसे कई जिलों में अधिकारी लगातार नजर रख रहे हैं।

ग्लेशियर फटने के बाद धौलीगंगा का जलस्तर इस तरह बढ़ा। किनारे के कई घर पानी में बह गए।
ग्लेशियर फटने के बाद धौलीगंगा का जलस्तर इस तरह बढ़ा। किनारे के कई घर पानी में बह गए।

अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की है कि वो अफवाहों पर ध्यान न दे। सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1905, 1070 और 9557444486 जारी किए हैं। सरकार ने अपील की है कि इस घटना के बारे में पुराने वीडियो सर्कुलेट कर अफवाह न फैलाएं। हरिद्वार में कुंभ मेला चल रहा है और इसलिए वहां अलर्ट जारी किया गया है।

ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को भी इस आपदा में काफी नुकसान पहुंचा है।
ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को भी इस आपदा में काफी नुकसान पहुंचा है।

जून 2013 में आई आपदा में 4 हजार से ज्यादा की जान गई थी
16-17 जून 2013 को बादल फटने और इसके बाद ग्लेशियर टूटने से रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिलों में भारी तबाही मची थी। इस आपदा में 4,400 से ज्यादा लोग मारे गए या लापता हो गए। 4,200 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया। इनमें 991 स्थानीय लोगों की अलग-अलग जगह मौत हुई। 11,091 से ज्यादा मवेशी बाढ़ में बह गए या मलबे में दबकर मर गए।

ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 मकानों का नामों-निशान मिट गया। 100 से ज्यादा होटल तबाह हो गए। आपदा में 9 नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए थे।

Leave a Reply