मालवा निमाड़; सीमा चौकियों से बिना जांच के निकले हजारों लोग, संक्रमण फैलने की आशंका

Coronavirus in Malwa Nimar देशव्यापी लॉकडाउन में मप्र से लगती राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से हजारों लोगों के गुजरने की सूचनाएं मिल रही हैं। हालांकि गुजरात से लगती सीमा के पिटोल चेकपोस्ट को पूरी तरह से सील कर दिया गया है।

बुधवार से सख्ती और बढ़ी नजर आई। पुलिस ने गुजरात से प्रदेश में आने वाले सभी रास्तों पर अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है। सड़कों पर फ्लाइंग स्क्वॉड की मोबाइल भी नजर रख रही है। दूसरी ओर गुजरात सीमा से सटे पंचमहाल में भी प्रशासन ने लॉकडाउन करते हुए सख्त रवैया अपना रखा है। सीमा से अब तक तीन लाख के करीब लोग गुजर चुके हैं। इनमें से करीब पौने दो लाख लोगों की सिर्फ स्क्रीनिंग हो पाई। शेष लोग कहां गए? झाबुआ जिले में ही हजारों लोग अपने गांव पहुंच चुके हैं।

गांव में अब प्रशासन ने पटवारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और कोटवारों को जवाबदारी देकर ग्रामीणों को सावधानी बरतने व जागरूक करने का कार्य सौंपा है। कर्मचारियों को सर्दी, जुकाम व बुखार आने वाले मरीजों को तत्काल इलाज के जिला चिकित्सालय भेजने के निर्देश भी दिए गए। पिटोल चेकपोस्ट पर कोई भी क्वारंटाइन सेंटर नहीं बनाया गया है। सीमा पर आने वाले लोगों के लिए जिले में 250 क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं, जहां उनकी स्वास्थ्य टीम द्वारा देखरेख की जा रही है।

छात्रावास में दी पनाह, शारीरिक दूरी का पालन नहीं

सेंधवा (बड़वानी)। 30 मार्च से प्रशासन ने महाराष्ट्र सीमा को सील कर दिया गया है। इससे अब महाराष्ट्र की ओर से आने वाले लोगों को आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। महाराष्ट्र की ओर से आए 534 लोगों को सेंधवा के पास छात्रावास में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया।

यहां सुरक्षित शारीरिक दूरी, मास्क लगाने व सैनिटाइज करने का पालन नहीं दिखाई दिया। न ही पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं दिखी। गौरतलब है कि लॉकडाउन के बाद से 30 मार्च तक प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन से हजारों लोग मप्र की सीमा से बिना जांच के मप्र सहित उप्र, राजस्थान, पंजाब सहित अन्य प्रदेशों में जा चुके हैं। अनुमान के मुताबिक सीमा से मप्र सहित अन्य प्रांतों में 10 हजार से अधिक लोग आ चुके हैं। प्रशासन के मुताबिक बड़वानी जिले को छोड़कर अन्य शहरों को जाने वाले लोगों की कोई जानकारी नहीं दर्ज की गई।

यहां भी सुरक्षित नहीं

सेंधवा जामली गांव स्थित छात्रावास में महाराष्ट्र के लातूर से आए राजस्थान आबू निवासी शैलेष द्विवेदी और उनके भाई का परिवार भी मौजूद था। इनके साथ तीन बच्चे भी हैं। ये लोग सुविधाएं न होने से परेशान दिखे। शैलेष ने कहा कि यहां भी हम सुरक्षित नहीं हैं। बच्चे परेशान हो रहे हैं।

उन्होंने प्रशासन से राजस्थान छुड़वाने की मांग की।कलेक्टर अमित तोमर व एसपी डीआर तेनीवार भी महाराष्ट्र सीमा पहुंचे। वे महाराष्ट्र के धुलिया प्रशासन से बात करने भी गए। धुलिया प्रशासन ने सीमा पर चौकी बनाने की बात कही है।

रतलाम : शुरुआत में नहीं थे जांच के इंतजाम जिले की सीमाएं भी सील की गई हैं। राजस्थान से लगी होने से 22 मार्च के पहले से ही बड़ी संख्या में लोगों का आना शुरू हो गया था।महाराष्ट्र में काम कर रहे राजस्थान के लोग भी रतलाम से होकर निकले। इन दस दिनों में बाहर काम कर रहे जिले के करीब 12 हजार से अधिक लोग वापस आए तो जिले से होकर निकलने वालों की संख्या 25 हजार से ज्यादा रही। इसमें सर्वाधिक लोग राजस्थान गए।

मंदसौर : रात को रुकवाए लोग सुबह होते ही चले गए जिला प्रशासन लाख दावे कर रहा है कि जिले की सभी तरफ की सीमाएं सील हैं। इसके बाद भी लोगों का आना-जाना जारी है। इनमें से केवल दो हजार लोगों की ही जांच हो पाई है, बाकी तो इधर उधर से निकल गए हैं।

महू-नीमच राजमार्ग पर स्थित नीमच जिले की सीमा पर सोमवार-मंगलवार को 1300 यात्रियों को रोका था और इन्हें मक्खन सिंह ढाबा,जाग्रति स्कूल, कन्या शाला में रुकवाया था। लेकिन ये लोग रात में रास्ते खोजकर सुबह तक गायब हो गए। अब शिविर सूने पड़े हैं।

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