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GST Scam : इंदौर में 28 कंपनियां निकली फर्जी


इंदौर। जीएसटी आईटीसी के फर्जीवाड़े की तह तक पहुंचने की कोशिश में मंगलवार को भी छापमार कार्रवाई हुई। सेंट्रल एक्साइज एंड कस्टम (सीजीएसटी) और वाणिज्यिक कर विभाग (एसजीएसटी) की टीम ने इंदौर में चार फर्मों की जांच शुरू की। जांच का केंद्र लोहा मंडी में स्टील और स्क्रैप कारोबारी रहे। देर रात तक जांच जारी थी। इससे पहले विभाग की टीमें कुल 28 कंपनियों की जांच कर चुकी है। अब तक सभी फर्जी निकली हैं।

मंगलवार को लोहा मंडी में एक ही परिसर में दो फर्मों की जांच की गई। एक फर्म सरिए के कारोबार से जबकि दूसरी स्क्रैप के कारोबार से जुड़ी है। सूत्रों के मुताबिक, एक फर्म महाराष्ट्र के जालना से बड़े पैमाने पर माल खरीदती थी। बिना बिल और बिल के माल के अलग-अलग दाम भी हर दिन घोषित किए जाते थे। कई बिल फर्जी फर्मों के नाम से होने की जानकारी मिली है। विभाग की टीमें दस्तावेज खंगालने में जुटी थी लेकिन विभाग ने फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।

इधर जांच की कमान संभाल रही टीम की ओर से इनपुट टैक्स क्रेडिट फर्जीवाड़े में संदेही 10 से ज्यादा फर्मों के कर्ताधर्ताओं को समंस भी जारी किए गए हैं। इससे पहले सोमवार को मुंबई से फर्म का एक प्रोप्रायटर बयान देने जांच टीम के सामने पहुंचा। उसने बताया कि असल में किसी कंपनी का मालिक नहीं होते हुए वह बेरोजगार है। उससे किसी ने नौकरी दिलवाने के नाम पर दस्तावेज लिए थे। बाद में उसी के नाम से कंपनी बनाकर जीएसटी के फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया। अब तक विभाग इस तरह की कुल 28 कंपनियां या फर्मों की जांच कर चुका है।

100 के पार पहुंचेगा आंकड़ा

विभाग की जांच के साथ शक के दायरे में आने वाली कंपनियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। अब तक विभाग 28 की जांच कर चुका है। मंगलवार को चार फर्म लिस्ट में और जुड़ी। आगे इनकी संख्या 100 के पार हो सकती है। दरअसल विभाग एक-दूसरे से माल खरीद रही हर कंपनी की जांच में जुटा है। ऐसे में एक-एक कंपनी से जितनी भी कंपनियों ने खरीदारी या बिक्री की सबका सत्यापन किया जा रहा है। जांच में जुटे अधिकारी भी असमंजस में है कि असली मास्टरमाइंड तक वे पहुंचें कैसे।

अब तक जो संदेही सामने आए हैं उनमें से एक भी कारोबार जुड़ा हुआ नहीं निकला है। ऐसे में किसी को भी आरोपी नहीं बनाया जा सका। घोटाला करार दिए जा रहे इस मामले में असल में कागजी फर्में बनाई गई। फर्जी फर्मों के नाम से खरीदी और टैक्स चुकाया दिखाकर विभागों में रिटर्न दिखाया गया। इसके बाद फर्जी बिलों के इस टैक्स के सहारे आगे लगातार उस टैक्स का क्रेडिट एक से दूसरी फर्म और कंपनी में फारवर्ड किया जाता रहा। ऐसी तमाम कंपनियां भी कागज पर बनाई गईं। विभाग फायदा हासिल करने वाली आखिरी कंपनी और व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश में जुटा है। हालांकि अब तक ठोस सुराग नहीं मिल सका है।

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