MP में भारी बारिश, बड़वानी में नर्मदा के जलस्तर ने रिकॉर्ड तोड़ा

मालवा निमाड़। अंचल में मंगलवार को बारिश का क्रम जारी रहा। कहीं रिमझिम तो कहीं तेज वर्षा से नदी-नाले उफान पर रहे। बांधों के गेट खोलने से नर्मदा उफान पर है। मोरटक्का में नर्मदा पुल पर तीसरे दिन भी यातायात शुरू नहीं हो सका। इंदौर-खंडवा सहित कई रास्तों पर यातायात अवरुद्ध रहा। बड़वानी के राजघाट में नर्मदा का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उज्जैन जिले में बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई।

खंडवा : शहर की तीन पुलिया में भरे पानी में एक वृद्ध बह गया। होमगार्ड की टीम दिनभर तलाशती रही। इंदिरा सागर बांध के 12 गेटों से 20 हजार 800 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं ओंकारेश्वर बांध के 18 गेटों से 23 हजार क्यूमेक्स पानी छोड़े जाने से नर्मदा उफान पर है। मोरटक्का में नर्मदा का जलस्तर 166.550 मीटर है, जबकि 167 मीटर के बाद पानी पुल को छूने लगता है।

बड़वानी : मंगलवार शाम नर्मदा का जलस्तर अब तक के रिकॉर्ड 136.800 मीटर पर पहुंच गया है। इससे पूर्व 1970 में जलस्तर 136.680 मीटर तक पहुंचा था। जिला प्रशासन ने अब तक सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन करते हुए राजघाट के टापू बने हिस्से से 20 परिवारों को सामान सहित बाहर निकाला। इस दौरान हंगामा भी हुआ।

उज्जैन : बड़े पुल से शिप्रा 5-6 फीट नीचे बह रही है। नागदा के समीप बिजली गिरने से ग्राम खजूरिया में दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई। वहीं कायथा में छोटी कालीसिंध नदी पार करते समय तेज बहाव में बहने से एक युवक की मौत हो गई।

धार: जिले के नालछा में दोपहर करीब एक घंटे में तीन इंच से ज्यादा बारिश हुई। साप्ताहिक हाट बाजार प्रभावित हुआ और दुकानों में पानी घुस गया। सुसारी में भी तेज बारिश से 30 साल बाद नाले का पानी गांव की सड़कों व घरों के सामने से बह निकला। सुसारी-डही मार्ग 6 घंटे तक बंद रहा। मांडू मार्ग पर एक घंटे आवाजाही प्रभावित रही।

शाजापुर : लगातार तीसरे दिन रिमझिम और तेज बारिश चीलर, लखुंदर और कालीसिंध नदी उफान पर, जिले में अब तक 53.8 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। यहां 1973 में 71 इंच और 2006 में 72 इंच हुई थी बारिश।

खरगोन : महेश्वर में नर्मदा के घाट और छतरियां जलमग्न हैं। नर्मदा के बीच बना हुआ बाणेश्वर मंदिर आधे से अधिक डूब गया है। 1962 में आई बाढ़ में इस मंदिर की गुंबद बह गई थी। जो अभी भी धर्मपुरी के आसपास पड़ी हुई है। एक दशक पूर्व इस मंदिर की गुम्मत का पूर्ण निर्माण पुनः निर्माण शिवाजीराव होल्कर की पुत्री के विवाह समारोह के 1 वर्ष पूर्ण होने पर किया गया था। इस मंदिर का निर्माण उसी शैली में किया गया है, जिस शैली में उत्तराखंड में निर्मित केदारनाथ मंदिर का किया गया है। मंदिर का पिछला हिस्सा तिकोनी हिस्से में बना हुआ है। वही मंदिर का आधार भी तिकोनी हिस्से में किया गया है। जिससे नर्मदा में आने वाली बाढ़ इस मंदिर के आसपास से एक कटाव के रूप में निकल जाती है। वही मंदिर के आधार एवं गर्भ गृह को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता है।

रतलाम : जिले में छोटी पुल-पुलियाओं और रपटों पर पानी आने से कई रास्ते आठ से दस घंटे तक अवरुद्ध रहे। निचली बस्तियों के घरों और खेतों में पानी घुस गया।

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