लैंडर विक्रम से संपर्क की कोशिश जारी, इसरो ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नई दिल्ली। इसरो ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि वह चंद्रयान- 2 के विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। चंद्रयान के ऑर्बिटर ने इसकी सही स्थिति का पता लगा लिया है। इसरो चेयरमेन के सिवन ने रविवार को कहा था की विक्रम लैंडर की सही स्थिति पता लग चुकी है और उसको लगातार सिग्नल भेजकर उसकी स्थिति का पता लगाया जा रहा है।

इस संबंध में यह सवाल हर शख्स के जेहन में आ रहा है कि आखिर विक्रम से संपर्क कैसे स्थापित होगा? इस मामले में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसरो को विक्रम के साथ संपर्क बनाने वाली फ्रिक्वेंसी का पता है। इसलिए अलग-अलग कमांड भेजकर विक्रम से जवाब की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन अभी तक इस मामले में कोई कामयाबी नहीं मिली है। इसरो संपर्क स्थापित करने के लिए कर्नाटक में बैंगलुरू के एक गांव बयालालु में स्थापित एक ऐंटेना का उपयोग कर रहा है। इस ऐंटेना का स्पेस नेटवर्क सेंटर बैंगलुरू में है।

विक्रम तीन ट्रांसपोंडर्स और एक आरे ऐंटेंना से लैस है। इसके ऊपर गुम्बद जैसा यंत्र लगा हुआ है। विक्रम इन्ही उपकरणों का सहारा लेकर पृथ्वी या इसके ऑर्बिटर से सिग्नल लेगा या इसके जवाब देगा। हालांकि अभी तक इस बात का पता नहीं चला है कि इसके उपकरण कितने सही सलामत है। विक्रम में सोलर पैनल लगा हुआ है और एक बैटरी भी लगी हुई है, लेकिन फिलहाल यह साफ नहीं है कि वह पावर जनरेट कर रहा है या नहीं।

इसरो के मुताबिक विक्रम को सिर्फ एक लुनर डे यानी 14 दिन तक ही सूरज की रोशनी मिलेगी। इसलिए इसरो 14 दिनों तक अपनी कोशिशों को जारी रह सकता है। यदि इसरो को यह पता चला कि उसके अंदर के उपकरण टूट गए हैं तो वह इस काम पर विराम भी लगा सकता है। हालांकि अभी तक ऑर्बिटर की सेहत दुरुस्त है इसलिए वह साढ़े सात साल तक वह अपनी सेवाएं दे सकता है।

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