Good News: ओरछा को यूनेस्को ने विश्व धरोहरों की अस्थायी सूची में शामिल किया

निवाड़ी। मर्यादा पुस्र्षोत्तम भगवान श्रीराम के अयोध्या के बाद दूसरे धाम ओरछा को दुनिया में नई पहचान मिलने जा रही है। आर्केलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले में स्थित ओरछा को यूनेस्को ने विश्व धरोहरों की अस्थायी सूची में शामिल कर लिया है। एएसआई ने यह प्रस्ताव एक माह पहले 15 अप्रैल को भेजा था। 16वीं सदी में बुंदेला राजवंश द्वारा बनवाए गए स्थापत्य कला के उत्कृष्ठ नमूने को देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक और श्रद्धालु यहां आते हैं।

ओरछा नगरी को दूसरी अयोध्या कहा जाता है। यहां के श्रीरामराजा मंदिर में विराजित भगवान श्रीराम राजा के रूप में पूजित हैं। यह दुनिया का एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां भगवान श्रीराम को राजा की मान्यता है। भगवान श्रीरामराजा सरकार का स्र्तबा अब भी पूरी तरह राजशाही है, उन्हें दिन में पांचों पहर सशस्त्र गार्डों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दिया जाता है। गार्ड ऑफ ऑनर देने के लिए मंदिर के प्रवेश द्वार पर एसएएफ के 11 जवान तैनात रहते हैं, जो तीन-तीन घंटे के अंतराल से ड्यूटी देते है। इनमें एक प्लाटून कमांडर, दो प्रधान आरक्षक व आठ आरक्षक शामिल हैं।

हर माह पुष्य नक्षत्र में बड़ी संख्या में आते हैं श्रद्धालु

उप्र के झांसी जिले से 18 किमी दूर निवाड़ी जिले के मुख्य मार्ग पर बेतवा नदी के तट पर स्थित ओरछा ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के साथ ही प्राकृतिक रूप से रमणीक नगर है। निवाड़ी जिला प्रशासन के अधीन ओरछा के श्रीरामराजा मंदिर ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष निवाड़ी कलेक्टर हैं।

मंदिर के नियमित धार्मिक कार्यक्रम ट्रस्ट की देखरेख में संचालित होते है। मंदिर में यूं तो प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु श्रीरामराजा सरकार के दर्शनों के लिए आते हैं, लेकिन प्रतिमाह पुष्य नक्षत्र में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। रामनवमी के मौके पर श्रद्धालुओं की संख्या 50 हजार से अधिक हो जाती है।

राजा स्र्द्रप्रताप ने की ओरछा की स्थापना

ओरछा राज्य की स्थापना बुंदेला राजा रूद्रपताप ने सन 1530 में की थी। 1554 में मध्ाुकरशाह ओरछा की गद्दी पर बैठे। स्वतंत्र ओरछा राज्य की स्थापना वीरसिंहदेव ने 1605-27 में की। ओरछा के बुंदेला राजवंश में वीरसिंह देव पराक्रमी राजा हुए। वीरसिंह देव ने मुगल बादशाह अकबर से बगावत कर दिल्ली के तख्त पर काबिज होने के लिए प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में कैंप किए।

शहजादा सलीम (जहांगीर) से मित्रता कर जहांगीर के कहने पर मुगल बादशाह के प्रधानमंत्री अबुल फजल का सिर कलम कर शहजादा के समक्ष पेश किया था। जब जहांगीर बादशाह बना तो उसने वीरसिंह देव को ओरछा का राज्य तथा दिल्ली दरबार में स्थान दिया।

महाराजा वीरसिंह देव ने जहांगीर के बुंदेलखंड दौरे पर उसके स्वागत के लिए दतिया में सतखंडा महल व ओरछा में जहांगीर महल का निर्माण कराया था, यह ऐतिहासिक इमारतें आज भी अपने गौरवशाली इतिहास का बखान करती है। जहांगीर महल की स्थापत्य कला को निहारने के लिए प्रतिदिन हजारों विदेशी मेहमान ओरछा आते हैं।

ओरछा के दर्शनीय ऐतिहासिक स्थल

जहांगीर महल, राजमहल, रायप्रवीण का महल, चतुर्भुज मंदिर, तोपखाना, सावन भादो स्तंभ, फूलबाग, वीर हरदौल का बैठका, बेतवा नदी के तट से राजसी छतरियां, जहांगीर महल में साउंड एंड लाइट कार्यक्रम।

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