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कृषि क्षेत्र सरकार के लिये प्राथमिक- कृषि मंत्री

दिल्ली।केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र के संकट को दूर करने के लिये जल्द ही कई बड़े उपायों की घोषणा कर सकती है। कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने इसके संकेत दिये। लोकसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार की तरफ से ऐसी घोषणा काफी अहम मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार कृषि मंत्रालय ने छोटे और सीमांत किसानों की आय में कमी की समस्या से निपटने के लिए एक कैबिनेट नोट तैयार किया है। इस कैबिनेट नोट में एक वित्तीय पैकेज और समय पर फसल ऋण चुकाने वालों के लिए ब्याज माफी सहित विभिन्न कदमों का प्रस्ताव किया गया है। सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय, नीती आयोग, कृषि और वित्त मंत्रालयों के अधिकारियों के बीच कई बैठकों के बाद इस मसौदा नोट को अंतिम रूप दिया गया है।

किसानों के लिए हो सकती है नई घोषणा

एक कार्यक्रम के मौके पर यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार एक बड़े कृषि पैकेज की घोषणा कर सकती है, कृषि मंत्री ने कहा कि जब यह घोषणा की जाएगी, तो सभी को पता चल जाएगा। बजट से पहले या उसके दौरान हर साल, हमने किसानों के लिए कुछ नया घोषित किया है। निश्चित रूप से, इस बार भी किसानों के लिए कुछ नया होगा।

प्रधानमंत्री स्वयं कृषि योजनाओं की कर रहे हैं निगरानी

उन्होंने कहा कि राजग सरकार की खासियत यह रही है कि उसने पिछले चार-साढ़े चार साल में किसान समुदाय के लिए हर साल कुछ नया करने की घोषणा की है। लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) के रजत जयंती समारोह में बोलते हुए कृषि ने कहा कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से सभी कृषि योजनाओं की निगरानी कर रहे हैं।

कृषि क्षेत्र सरकार के लिए प्राथमिक

उन्होंने कहा कि नतीजतन कई योजनाएं किसान समुदाय को लाभान्वित कर रही हैं। हालांकि, कुछ (विपक्षी दल) अभी भी सवाल उठाते हैं कि केवल नारे लगाने से किसानों को लाभ नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में कृषि क्षेत्र के लिए बजट का आवंटन बढ़ा है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र हमेशा इस सरकार के लिए प्राथमिकता रहा है। यह सरकार किसानों के कल्याण के लिए काम करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

तीन राज्यों में हार के बाद किसानों के मुद्दों पर सरकार गंभीर

उन्होंने कहा कि हम पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस साल के अंत तक हर खेत को पानी और बिजली मिल जाएगी। केंद्र सरकार ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा के हारने के बाद से किसानों के मुद्दों को गंभीरता से लेना शुरु कर दिया है। इन राज्यों में ग्रामीण संकट को भाजपा की हार का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

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