कमलनाथ की मध्यप्रदेश से बिदाई तय…प्रश्न चिन्ह बन गया है।

भोपाल :- कमलनाथ की दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद से ही उनके केंद्रीय राजनीति में जाने को लेकर अटकलें तेज हैं। हालांकि पहले दिल्ली और वहां से लौटने के बाद भोपाल में कमलनाथ कह चुके हैं कि वे प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहेेंगे, मप्र नहीं छोड़ेंगे। राजनेता बार-बार कोई बात दोहराएं तो लोगों को ‘दाल में कुछ काला’ नजर आने लगता है, क्योंकि आमतौर पर नेता जो बोलते हैं, वह होता नहीं। पर्यावरण पर लिखी एक पुस्तक के लोकापर्ण कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से जुड़े लोगों ने जिस तरह अगला चुनाव कमलनाथ के चेहरे पर लड़ने की बात कही, इससे भी कहीं कोई गड़बड़ के संकेत मिलते हैं। शुरुआत दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह ने की। समर्थन पहले दिग्विजय के बेटे जयवर्धन सिंह ने किया, इसके बाद डा. गोविंद सिंह ने। पर्दे के पीछे का सच यह तो नहीं कि सब बोलते कुछ रहें और कमलनाथ की विदाई हो जाए, जिस तरह पंजाब के मुख्यमंत्री चाहते थे कि नवजोत सिंह सिद्धू प्रदेश अध्यक्ष न बने लेकिन बन गए। इसी प्रकार कमलनाथ बोलते रहें कि वे प्रदेश की राजनीति नहीं छोड़ेंगे और उन्हें मजबूर कर दिया जाए। फैसला क्या होता है यह बाद में पता चलेगा लेकिन कमलनाथ को केंद्र में ले जाने की कसरत तो चल रही है।

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