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जब नीरज मंडलोई ने दिया अपना परिचय तो चौंक गए मुख्यमंत्री कमलनाथ

भोपाल। सर, मैं नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव माइनिंग और हायर एजुकेशन हूं। इतना सुनकर मुख्यमंत्री कमलनाथ थोड़ा चौंके और अचरज जताते हुए मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह से पूछा कि ये कैसा कॉम्बीनेशन है। मुख्य सचिव ने उन्हें बताया कि मूलत: ये प्रमुख सचिव खनिज साधन हैं और उच्च शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार दिया है। नया अधिकारी खोज रहे हैं।

यह संवाद बुधवार को मंत्रालय में मंत्रियों का वरिष्ठ अधिकारियों से परिचय कराने बुलाई बैठक में हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री ने फिर दो-टूक कहा कि हीला-हवाली और सुस्ती बर्दाश्त नहीं होगी। सभी अपना नजरिया बदलें। अब इंटरनेट का जमाना है। सोचें कि जनता को इसका कैसे ज्यादा से ज्यादा लाभ पहुंचाया जा सकता है।

मंत्रालय में करीब एक घंटे चली बैठक में अधिकारियों का मंत्रियों से औपचारिक परिचय कराया गया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि मैं चाहता हूं कि मंत्री सिर्फ उन्हीं अधिकारियों को न जानें, जो उनके विभाग से जुड़े हों, बल्कि सभी से परिचय होना चाहिए।

मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने सबसे पहले अपना परिचय देते हुए बताया कि मैं 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो रहा हूं। आप सभी को भरोसा दिलाता हूं कि मध्य प्रदेश में अच्छी टीम है। कर्मठ और अनुभवी हैं और इनका बड़ा विजन है।

कुछ और वरिष्ठ अधिकारियों ने जब अपने बारे में बताया तो मुख्यमंत्री ने टोकते हुए कहा कि आप यह भी बताएं कि कब से पदस्थ हैं। इसके बाद नंबर प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई का आया। इसी तरह लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता अखिलेश अग्रवाल ने जब बताया कि वे सात साल से इस पद पर हैं तो मुख्यमंत्री बोले, क्या सात माह हो गए हैं तो अग्रवाल ने कहा कि नहीं सर सात साल। इसके बाद सामान्य तौर पर परिचय का सिलसिला चलता रहा है। अधिकारियों ने अपनी मौजूदा पदस्थापना को लेकर जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने इस दौरान साफ किया कि प्रशासन मुख्यमंत्री सचिवालय से चले, यह नहीं होगा। विभाग मंत्री चलाएंगे। पार्टी का वचन पत्र सभी को दिया जा चुका है। इसमें जो वादे हमने किए हैं, उनको पूरा करने का हर विभाग रोडमैप और समय सीमा तय करेगा। हर विषय और कार्यप्रणाली को नए नजरिए और दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। पुरानी परंपराओं से अलग हटकर काम करना है। व्यवस्था में बदलाव के लिए लोगों ने हमें चुना है। आज इंटरनेट का दौर है। हम इसका उपयोग प्रदेश के लिए ज्यादा से ज्यादा कैसे कर सकते हैं, यह देखें।

सीएम ने कहा कि जीरो टॉलरेंस हमारी पॉलिसी रहेगी। सुस्ती और हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं होगी। जो काम तहसील और जिले में हो सकता है, उसके लिए किसी को मंत्रालय या मेरे पास क्यों आना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो इसके मायने यह हैं कि निचले स्तर पर जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं। ऐसे किसी भी अधिकारी-कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। मंत्रिपरिषद की बैठकों के साथ विभागों की बैठकें भी जल्द ही आयोजित की जाएंगी। इस दौरान सभी मंत्रियों के साथ अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव और विभागाध्यक्ष मौजूद थे।

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