मध्यप्रदेश

करोड़ों की संपत्ति हड़पकर वृद्ध प्रोफेसर को घर से निकाला, शिष्यों ने दिया आसरा

भोपाल। कभी हजारों विद्यार्थियों के प्रेरणास्त्रोत रहे भौतिक शास्त्र के शिक्षक विजय झोपे आज उम्र के अंतिम पड़ाव में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। करोड़ों की संपत्ति के मालिक झोपे ने अपनी संपत्ति भाई-बहनों और बेटे-बेटियों में बांट दी। जिसका नतीजा यह रहा कि आज दो रोटी के लिए वे भीख मांग रहे हैं। जब उनके विद्यार्थियों ने उन्हें कटारा हिल्स स्थित ग्लोबल पार्क सिटी के पास भिखारी के रूप में देखा तो उनका दिल दहल गया।

 एक विद्यार्थी अक्षय गार्गव समोसे की दुकान के पास भिखारी को समोसे देने गए तो उनकी पथरीली आंखें जानी पहचानी सी लगी। कुछ बात करने की कोशिश की तो उन्हें विजय झोपे सर जैसी आवाज लगी। फिर उन्होंने और भी उनके विद्यार्थियों को बुलाकर पहचान कराई। इसके बाद झोपे सर को कोलार रोड स्थित वृद्धाश्रम अपना घर ले गए। वहां पर उनका इलाज भी चल रहा है।

लिखकर बताया परिवार का नाम

नालंदा विद्यालय में विद्यार्थी उनके नाम से डरते थे। वे अनुशासित शिक्षक होने के साथ-साथ सुलझे हुए व्यक्ति थे। वे विद्यार्थियों को भौतिकी के सूत्र याद नहीं होने पर मारते भी थे। लेकिन, पढ़ाते ऐसे थे कि बच्चों को भौतिकी और अंग्रेजी कंठस्थ हो जाती थी। उन्होंने कैम्पियन स्कूल में भी कई सालों तक अपनी सेवाएं दी। आज वे मिलने वालों को अपना और परिवार का नाम लिख-लिखकर बता रहे हैं। यह भी कह रहे हैं कि दस दिन में तुम्हें भौतिकी के सूत्र सीखा दूंगा।

पत्नी शिक्षिका व बेटा-बेटी सभी बड़े पदों पर

शिक्षक झोपे की पत्नी सुधा सरोजनी नायडू स्कूल में शिक्षिका रही हैं। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है।जिसमें बड़ी बेटी सोनाली शिक्षिका, दूसरी बेटी रूपाली डॉक्टर, तीसरी बेटी पूनम एसबीआई में डिप्टी मैनेजर, बेटा मनीष सीए हैं। लेकिन इनमें से कोई भी उन्हें लेने के लिए तैयार नहीं है।

दस नंबर मार्केट में करोड़ों की संपत्ति

विजय झोपे की आज करोड़ों की संपत्ति है। उन्होंने कुछ साल पहले दस नंबर मार्केट स्थित मकान को एक करोड़ में बेचकर भाई-बहनों और बच्चों में बांट दिया। इसके बाद उनका अरेरा कॉलोनी और बागमुगालिया के पार्क सिटी में 40 लाख का मकान है, जिसे उनके परिजनों ने हड़प लिया और इन्हें मोहल्ले वालों से प्रताड़ित कराकर घर से निकाल दिया। झोपे के भाई-बहन अमेरिका में रहते हैं। इतने भरे-पूरे परिवार के बाद भी विजय झोपे आखिर सड़क पर भीख मांगने के लिए क्यों मजबूर हुए, यह सवाल उनके शिष्यों को परेशान कर रहा है।

पहले इलाज करवाएंगे, फिर परिजनों के पास भजेंगे

हमारी कोशिश है कि पहले इनका इलाज कराकर इन्हें पूरी तरह से ठीक किया जाए। इसके बाद इनके परिवार वाले सामने आते हैं तो उन्हें भेजा जाएगा। अभी तक हमारी संस्था से 18 बेघर लोगों को परिवार के पास पहुंचाया है – माधुरी मिश्रा, संचालिका, अपना घर

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