
1.परमेश्वर कांग्रेस का दलित चेहरा माने जाते हैं. उनको राजनीति में आने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने प्रेरित किया था.
2.परमेश्वर का जन्म 6 अगस्त 1951 को कर्नाटक के गोलाहोली में हुआ. उनकी स्कूली शिक्षा सिद्धार्थ हाई स्कूल में हुई थी. ये स्कूल परमेश्वर के पिता ने ही बनाया था. इसके बाद तुमकुर के सरकारी प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बेंगलुरु की एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से एग्रीकल्चर में बीएससी और फिर एमएससी की. बाद में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की एडिलेड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की.
3.परमेश्वर के पिता समाजसेवी, शिक्षक और एमएलसी थे. उन्होंने बाद में सिद्दार्थ एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना थी. ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद परमेश्वर यही पर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर बने.
4. जी परमेश्वर साल 2015 से 2017 तक कर्नाटक के गृह मंत्री थे. फिलहाल परमेश्वर कर्नाटक प्रदेश कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष हैं. साल 2010 में उन्हें KPCC का अध्यक्ष बनाया गया था.
5. साल 2013 में परमेश्वर कोरतागेरे सीट से जेडीएस के उम्मीदवार सुधाकरा लाल के खिलाफ चुनाव हार गए थे. इस चुनाव में कांग्रेस ने जीत का श्रेय जी परमेश्वर को ही दिया था लेकिन हार के चलते वे मुख्यमंत्री नहीं बन सके जबकि वे इस पद के प्रबल दावेदार थे.
6. पिछले साल यानी 2017 में उन्होंने गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. पार्टी हाईकमान ने परमेश्वर को कर्नाटक प्रदेश कमेटी का अध्यक्ष बने रहने को कहा था. उस वक्त परेमेश्वर ने कहा था कि सोनिया और राहुल गांधी ने उन्हें 2018 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए मंत्री पद छोड़ने को कहा है.
7. 1999 से 2004 के बीच परमेश्वर मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के मंत्रीमंडल में हायर एजुकेशन, साइंस और टकनॉलोजी मिनिस्टर थे. साल 2002 में मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा ने परमेश्वर को प्रमोट करते हुए कैबिनेट मंत्री बना दिया. उस वक्त एसएम कृष्णा ने कहा था कि उन्हें पार्टी में युवा चेहरे की जरुरत है और ऐसे में परमेश्वर को मौका मिल गया.
8. 1989 में पमेश्वर पहली बार एमएलए चुने गए. मधुगिरी विधानसभा क्षेत्र में उन्होंने जनता दल के सी राजवर्धन को हराया था. साल 1993 में वीरप्पा मोइली के मंत्रिमंडल में वे राज्यमंत्री- सेरीकल्चर (रेशम उत्पादन) बनाए गए थे.
9. साल 1999 के विधानसभा चुनाव में मधुगिरी सीट पर परमेश्वर ने रिकॉर्ड जीत हासिल की थी.
10. साल 2016 में परमेश्वर ने महिलाओं के पहनावे पर विवादित बयान दिया था. बेंगलुरु के पॉश इलाके में 31 दिसंबर की रात नए साल के आगमन पर पार्टी करते हुए महिलाओं से छेड़खानी करने की कोशिश की गई थी. परमेश्वर उस वक्त गृहमंत्री थे उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए युवाओं के रहन-सहन के ‘पश्चिमी तौर-तरीकों’ को जिम्मेदार बताकर बखेड़ा खड़ा कर दिया था. मंत्री की टिप्पणी पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने उनसे इस्तीफे की मांग करते हुए ऐसे बयान पर देश की महिलाओं से माफी मांगने को कहा था.




