बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में बेटों से आगे निकल रही हैं-राष्ट्रपति

ग्वालियर। पिछले कुछ वर्षों से पूरे देश में देखा जा रहा है कि बेटियां शिक्षा के क्षेत्र में बेटों से आगे निकल रही हैं। यह बदलाव देश के सुनहरे भविष्य का संकेत है। यहां मुझे यह जानकर बेहद खुशी हुई कि 49 में से 26 स्वर्ण पदक बेटियों ने प्राप्त किए हैं। वास्तव में एक बेटी स्वयं में एक संस्था होती है। शिक्षित होकर वह दो परिवारों को शिक्षित करने का काम करती है। जीवन के अन्य क्षेत्रों में बेटियां नई-नई उपलब्धियां प्राप्त कर रही हैं

यह उद्गार राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने रविवार शाम को यहां जीवाजी विश्वविद्यालय के जिम्नेजियम हॉल में आयोजित दीक्षांत समारोह में व्यक्त किए। समारोह में प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, हरियाणा के राज्यपाल प्रो.कप्तान सिंह सोलंकी, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, नगरीय आवास एवं विकास मंत्री माया सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

शिक्षा की ललक हो तो कोई बाधा नहीं

राष्ट्रपति ने स्वर्णपदक लेने आईं श्रीमती नीलमणि अग्रवाल (66 वर्ष) को उदाहरण के रूप में पेश करते हुए बताया कि जब वह यहां आए, तो दो-तीन बहनों को बच्चों के साथ देखा था। बाद में जब नीलमणि अग्रवाल मंच पर स्वर्ण पदक लेने आईं, तो इस बात की पुष्टि हो गई कि यदि शिक्षा पाने की ललक हो तो कोई बाधा नहीं रह सकती। अपने प्रेरणा स्त्रोत पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम की शिक्षा पाने की संघर्ष भरी दास्तां सुनाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह उदाहरण मैंने इसलिए बताया कि यदि आपमें ललक हो तो आप कहीं से कहीं पहुंच सकते हैं। राष्ट्रपति ने प्रदेश सरकार की बालिका शिक्षा को लेकर चलाई जा रहीं योजनाओं को सराहा।

ग्वालियर की पहचान सिंधिया परिवार से 

गालव ऋ षि के नाम से ग्वालियर का नामाकरण होने की बात कहते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इसे तानसेन और बेजू बाबरा का नगर होने का भी सौभाग्य मिला। पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी की यह कर्मभूमि है। उससे भी बड़ी बात यह है कि यह नगर श्रीमती विजयाराजे सिंधिया से जुड़ा है। वर्तमान में ग्वालियर की पहचान उसी परिवार से जुड़ी है।

भारतीय पोशाक परंपरा को सराहा

राष्ट्रपति ने जेयू के दीक्षांत में भारतीय पोशाक की व्यवस्था को सराहा। कहा कि यहां आने पर उच्चशिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया व मुख्यमंत्री ने बताया कि इस व्यवस्था को केवल यहीं नहीं, वरन पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। लोगों ने इसे सहर्ष स्वीकार भी किया है।

ग्वालियर-चंबल में शिक्षा का प्रसार कर रहा जेयू 

जीवाजी विश्वविद्यालय के निरंतर विकास व दूरस्थ शिक्षण पद्धति की राष्ट्रपति ने सराहना करते हुए कहा कि मुझे कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला ने बताया कि यहां शुरुआत में 25 महाविद्यालय थे, जो अब 450 हो गए हैं। निश्चित तौर पर यह प्रसन्न्ता की बात है कि ग्वालियर-चंबल जैसे क्षेत्र में यह केन्द्र शिक्षा के प्रसार का सराहनीय काम कर रहा है। इससे विश्वविद्यालय के संस्थापकों की सूझबूझ का पता चलता है।

शपथ को मनमस्तिष्क में भी उतारें 

राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों को ईमानदारी के साथ ही दृढ़ इच्छा शक्ति रखनी होगी। अभी हम विकासशील देशों की श्रेणी में शामिल हैं। अब देश को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाना होगा। विद्यार्थियों द्वारा जो शपथ ली गई है, उसे अपने मन मष्तिष्क में उतारें, तभी जीवन सार्थक होगा।

गुलामी का चोला उतारकर फेंक दिया है

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दीक्षांत समारोह का आयोजन भारतीय परिवेश में हो रहा है। पुरानी परंपराएं गुलामी का प्रतीक थीं। अब गुलामी का चोला उतारकर फेंक दिया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करें। सही इंसान वही है जो औरों के लिये जीता है। इसलिये देश व समाज के लिये कुछ करें।

236 को छात्रों को दी उपाधि 

दीक्षांत समारोह में 235 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि व गोल्ड मेडल दिए गए। 10 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल राष्ट्रपति ने अपने हाथों से दिया। शेष को मुख्यमंत्री ने स्वर्ण पदक दिए। डिग्रियां कुलपति प्रो.संगीता शुक्ला ने दी। संचालन कुलसचिव प्रो. आनंद मिश्रा ने किया।