अध्यापकों की चांदी बढेगा 32 सौ से 8 हजार तक वेतन

भोपाल। अध्यापक आंदोलन से  परेशान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोलारस और मुंगावली विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले उनकी शिक्षा विभाग में संविलियन की मांग भी पूरी कर दी। अध्यापक पहले दिन से ये मांग कर रहे थे। इससे उन्हें सातवां वेतनमान मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यानी वेतन में फिर 32 सौ से आठ हजार रुपए की वृद्धि होगी। वहीं अन्य लाभ भी मिलेंगे। इससे सरकारी खजाने पर करीब 450 करोड़ रुपए भार पड़ेगा।

प्रदेश के दो लाख 84 हजार अध्यापक अभी नगरीय निकाय और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी हैं। संविलियन के बाद वे स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारी कहलाएंगे। इससे अध्यापकों की आर्थिक स्थिति के साथ शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार आएगा। मूल विभाग में होने के कारण पढ़ाई और कार्रवाई आसान हो जाएगी। हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि संविलियन कब से माना जाएगा और उसकी शर्तें क्या होंगी। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में नियमित शिक्षक (व्याख्याता, उच्च श्रेणी शिक्षक और सहायक शिक्षक) को 52 हजार से 70 हजार रुपए महीने तक वेतन मिल रहा है।

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एकजुटता का मिला फायदा

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अध्यापकों को एकजुटता का फायदा मिला है। संवर्ग में सात संगठन होने के बाद भी अध्यापक एकजुट थे। इसलिए सरकार को शिक्षा विभाग में संविलियन करने का फैसला लेना पड़ा। जबकि प्रदेश में 4.64 लाख नियमित कर्मचारी अपनी मांगें पूरी नहीं करा पा रहे हैं, क्योंकि ये कर्मचारी 72 से ज्यादा संगठनों में बंटे हैं और अपनी एकजुटता प्रदर्शित नहीं कर पा रहे हैं। इसीलिए सरकार उनकी मांगों को टाल रही है।

मुंडन बना बड़ा कारण

अध्यापकों के लगातार आंदोलन और महिला अध्यापकों द्वारा मुंडन कराने का सरकार पर बड़ा फर्क पड़ा है। इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सरकार की किरकिरी हुई है। वहीं नगरीय निकाय चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन भी कमजोर हुआ है और सामने कोलारस एवं मुंगावली विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव है। इसलिए सरकार को आनन-फानन में ये घोषणा करनी पड़ी।

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दस साल में आठ पड़ाव पार

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वर्ष–अध्यापकों को क्या मिला

2007–अध्यापक संवर्ग बना।

2008–महिलाओं के निकाय परिवर्तन की मांग पूरी हुई।

2011–अंशदायी पेंशन योजना का लाभ मिला।

2012–पहली बार पदोन्नति दी गई।

2013–वेतनमान के नए स्लैब तय हुए।

2014–शर्तों के साथ पुरुष अध्यापकों के तबादले शुरू।

2016–छठवें वेतनमान का लाभ दिया गया।

2017–शिक्षा विभाग में संविलियन का निर्णय।

लग सकते हैं छह माह

मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी होने में छह माह से ज्यादा समय लग सकता है। सूत्र बताते हैं कि घोषणा के आधार पर सबसे पहले अध्यापकों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन करने का प्रस्ताव बनेगा। अध्यापकों को आर्थिक और अन्य लाभ देने में आने वाले खर्च का ब्योरा तैयार होगा। विभिन्न् विभागों के परीक्षण के बाद प्रस्ताव कैबिनेट जाएगा और फिर निर्णय होगा। तब कहीं संविलियन की नीति बनेगी और फिर आदेश जारी होंगे।

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