शिवपुरी में “मुंडन” को लेकर अध्यापक औऱ प्रशासन आमने-सामने

शिवपुरी। समान कार्य समान वेतन और शिक्षा विभाग में संविलियन को लेकर 13 जनवरी को भोपाल में सैकड़ों पुरुष अध्यापकों और 4 महिला अध्यापकों द्वारा मुंडन कराने और उसके बाद पनपे आक्रोश के चलते शिवपुरी सहित कई जिलों में मुंडन कार्यक्रम आयोजित किए गए थे।

मुंडन के इन आयोजनों से राष्ट्रीय स्तर पर सरकार की किरकिरी हुई थी। जिसके नतीजे में अब लोक शिक्षण संचालनालय ने अध्यापकों के इस विरोध प्रदर्शन पर सख्त रवैया अपना लिया है। आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय नीरज दुबे ने आदेश जारी किया है। इसमें उल्लेख किया गया है कि 13 जनवरी को भोपाल सहित जिलों में मुंडन कार्यक्रम शिक्षकीय आचरण व संसदीय परंपरा के विरुद्घ है।

ऐसे में इस विरोध प्रदर्शन में शामिल अध्यापकों को चिन्हित कर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इधर इस आदेश से अध्यापक संवर्ग और भड़क गया है। अध्यापक नेताओं का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से शांतिपूर्वक ढंग से सरकार के वादे अनुरूप अपनी मांगे पूरी करने की गुहार लगा रहे थे लेकिन सरकार ने अपनी हठधर्मिता नहीं छोड़ी इसलिए मजबूरन मुंडन आंदोलन का सहारा लेना पड़ा। सरकार की बौखलाहट इस प्रकार के आदेश से सामने आई है लेकिन अध्यापक डरने वाले नहीं हैं।

मुंडन और प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई

संचालनालय के आदेश में लिखा गया है कि विभाग व सरकार अध्यापकों की मांगों पर समय समय पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर निर्णय लेती रही है लेकिन अध्यापक व संविदा शिक्षक नियमित अध्यापन कार्य को छोड़कर प्रदर्शन करते हैं जिससे प्रत्यक्ष रूप से अध्यापन कार्य न होने से लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रदर्शन करने, मुंडन कराने एवं इस दौरान संस्थाओं से गैरहाजिर रहने वाले अध्यापकों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाए।

आवाज नहीं कुचल सकता प्रशासन

जायज मांगों को लेकर हम लंबे समय से संवैधानिक ढंग से ही ज्ञापन व प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगे सरकार के सामने रख रहे थे। मजबूर होकर मुंडन जैसे कदम उठाने पड़े हैं। कार्रवाई का डर दिखाकर सरकार या विभाग हमारी आवाज को नहीं कुचल सकता।

स्नेहसिंह रघुवंशी, जिलाध्यक्ष राज्य अध्यापक संघ

हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

शांतिपूर्ण ढंग से पिछले चार साल से अध्यापक अपनी मांगे रख रहे हैं। मुंडन कार्यक्रम भी शांतिपूर्ण ढंग से ही किया गया था। जिला स्तर पर स्कूल समय बाद शाम को प्रदर्शन किया लेकिन सरकार अध्यापकों को चुप कराने के लिए इस तरह के आदेश निकालकर आखिर क्या साबित करना चाहती है। हमारा आंदोलन जारी रहेगा।

सुनील वर्मा, जिलाध्यक्ष आजाद अध्यापक संघ