निःशुल्क वितरण के लिये आईं थीं पुस्तक, शिक्षक चला बेचने, फिर क्या हुआ जनिये

ट्रैक्टर ट्रॉली में निशुल्क वितरण की पुस्तकें भर कर बेचने जा रहे एक शिक्षक को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। बीच रास्ते में ही किताबें फेंककर शिक्षक ट्रैक्टर सहित रफ़ूचक्कर होने की फिराक में था मगर ग्रामीणों ने सजगता दिखाई, 100 डायल को खबर की। मौके पर पहुंची डायल 100 किताब बटोर कर लाई, पर आश्चर्य शिक्षा  विभाग के आलाअधिकारी इस मामले में मौन हैं। जनिये पूरा माजरा…

खनियाधाना । खनियाधाना के ग्राम सिमलार में माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य प्रमोद शर्मा गत दिवस अपने विद्यालय में निशुल्क वितरण पुस्तकों को वाहन में भरकर तड़के कबाड़े में बेचने के लिए खनियाधाना ला रहे थे  जिसकी खबर ग्रामीणों व छात्रों को लगते ही उन्होंने वाहन का पीछा किया और गांव से कुछ दूरी पर उसे पकड़ लिया।

शिक्षक से ग्रामीणों ने पूछा की किताबें छात्र-छात्राओं को ना बांटते हुए तुम कहां ले जा रहे हो तो शिमलार माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रमोद शर्मा जो की वाहन के साथ में थे बोले कि तुम्हारे बच्चे स्कूल पढ़ने तो आते नहीं हैं इसलिए इन किताबो को कबाड़े में खनियांधाना बेचने ले जा रहा हूं।

इतना सुनते ही ग्रामीण ने तत्काल डायल 100 पर फोन किया और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी को सूचना दी और वाहन के आगे खड़े हो गए जिस पर नाराज होकर प्रधान अध्यापक प्रमोद शर्मा ने वाहन चालक से ग्रामीण पर वाहन चढ़ाते की कहते हुए आगे बढ़ाने का कहने लगा उसने ट्रेक्टर आगे भी बढ़ा दिया जिससे कुछ ग्रामीण घायल होते होते भी बच गए।

पहुंची 100 डायल बनाई जप्ती

सूचना पाकर मौके पर आई डायल 100 कि आवाज आते ही शिक्षक किताबो को वही रास्ते में खाली करके मौके से फरार हो गया। हालांकि शिक्षक का वीडियो ग्रामीण लोगों ने बना डाला जो अभी भी ग्रामीणों के पास उपलब्ध है । बहरहाल  शिक्षक के भागने के बाद किताबों को इकट्ठा कर मौके पर डायल 100 की टीम द्वारा जब्ती बनाई गई

फिर भी नहीं सुन रहा शिक्षा विभाग 

ग्रामीणों का कहना है किताबें लेकर शिक्षा विभाग कार्यालय विकासखंड समन्वयक कार्यालय पहुंचे तो वहां पर कोई नहीं मिला। दूरभाष पर जब विकास खंड शिक्षा अधिकारी से संपर्क किया तो उन्होंने उल्टा ग्रामीणों को दोषी करार देकर धमकी दी और फोन काट दिया।

वितरण का नहीं रहता संस्था में कोई रिकॉर्ड :-

निशुल्क पुस्तक वितरण में प्रत्येक शासकीय पुस्तकों एक पर एक सीरियल क्रमांक डला जाता है जिसको वितरण करते समय रजिस्टर पर अंकित करने और संबंधित छात्र के हस्ताक्षर पावती करने का प्रावधान है, लेकिन यहां इस संस्था में ना तो रिकॉर्ड है और ना ही शासन के नियम की जानकारी

इनका कहना-इस संबंध में जब आरोपी प्रधानाध्यापक प्रमोद शर्मा से संपर्क करना चाहा तो उन्होंने बताया कि यह किताबें तो आदिवासियों बच्चे पढ़ने नहीं आते थे उनके घर जाकर बांट ने के लिए जा रहा था जो यह शिकायत करता है यह पूर्व में संस्था में अतिथि शिक्षक रहे हैं किताबें चुरा कर ले जाते रहे होंगे वही किताबें दिखा कर मुझे झूठा फंसाने का काम कर रहे हैं-प्रमोद शर्मा प्रभारी प्राचार्य शिमलार

मुझे इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई :– आपके द्वारा मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है मैं जांच कर दिखवाता हूं । आपके पास जो वीडियो या फोटो है मुझे आप WhatsApp पर दे दीजिए मैं मामले को समझकर कार्यवाही करवाता हूं। शिरोमणि दुबे डीपीसी जिला शिक्षा केंद्र शिवपुरी