मध्यप्रदेश के डॉक्टरों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, वसूली पर स्टे

सागर। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत डॉक्टरों को चार स्तरीय वेतनमान की वसूली मामले में बढ़ी राहत देते हुए सरकार के आदेश के खिलाफ स्टे ऑर्डर दिया है।
प्रदेश सरकार के सचिव, स्वास्थ्य सचिव व कमिश्नर वित्त विभाग सहित पांच को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सरकार के आदेश व हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज करते हुए मप्र मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. डीके गोस्वामी सहित डॉक्टरों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एल नागेश्वर राव एवं न्यायाधीश एमआर शाह की डबल बेंच ने मप्र के डॉक्टरों की तरफ से दाखिल की गई चार स्तरीय वेतनमान की वसूली को निरस्त कराने की याचिका को स्वीकार करते हुए स्टे-ऑर्डर जारी किया है।
सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार के साल 2012 के आदेश डॉक्टरों द्वारा तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं। इसमें मप्र मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन की याचिका के साथ बाकी दो याचिकाओं को डबल बेंच ने सुनवाई के साथ क्लब कर दिया है।
मप्र मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन, ग्वालियर डॉक्टर एसोसिएशन सहित डॉक्टरों अन्य संगठन सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट ने स्टे देते हुए प्रदेश सरकार के चार स्तरीय वेतनमान मामले में मप्र सरकार के सचिव वल्लभ भवन, कमिश्नर स्वास्थ्य विभाग, सेक्रेटरी वित्त विभाग, कमिश्नर वित्त विभाग एवं गैस राहत अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई की 8 मार्च 2019 दी गई है।
मप्र मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र गोस्वामी प्रदेश के डॉक्टरों की तरफ से पहले हाईकोर्ट व अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।
यह है मामला
एमपीएमओए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र गोस्वामी के अनुसार प्रदेश सरकार ने साल 2009 में स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्यरत डॉक्टरों को चार स्तरीय वेतनमान देने का आदेश दिया था। इसमें अगस्त 2008 से लाभ दिया जाना था। सबसे महत्वपूर्ण यह था कि इसमें काल्पनिक गणना के आधार पर डेट ऑफ ज्वाइनिंग से वित्तीय लाभ दिया जाना था। इसे लागू कर डॉक्टरों को चार स्तरीय वेतनमान का लाभ दिया गया था।
साल 2012 में सरकार ने नया आदेश जारी कर कहा कि पूर्व का आदेश वित्त विभाग की सहमति के बगैर जारी किया गया था, अत: उसे निरस्त किया जाता है तथा काल्पनिक गणना के अनुसार जो राशि डॉक्टरों को दी गई है उसमें 12.5 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज सहित वसूली की जाए।
सरकार के आदेश के खिलाफ डॉक्टर हाईकोर्ट गए थे। सिंगल बेंच ने रिकवरी को गलत माना था। सरकार ने इसके परिपालन में ब्याज की वसूली स्थगित कर मूल राशि की रिकवरी के आदेश दिए थे। मामले में सरकार ने डबल बेंच में रिकवरी को लेकर सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। अक्टूबर 2018 में इस निर्णय आया था। जिसके खिलाफ एमपीएमओए सुप्रीम कोर्ट चला गया था।
सरकार रिटायर्ड डॉक्टरों की पेंशन से वसूली कर रही
एमपीएमओए के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र गोस्वामी के अनुसार सरकार चार स्तरीय वेतनमान के तहत दिए गए आदेश पर इस कदर अमल कर रही है कि वह प्रदेश के करीब 800 डॉक्टरों के वेतन से लगातार रिकवरी कर रही है। इतना ही नहीं जो डॉक्टर सेवानिवृत्त हो गए हैं उनकी पेंशन से भी वसूली की जा रही है। जिन डॉक्टरों ने रिकवरी की राशि एकमुश्त जमा कर दी है, उनको ही पेंशन का लाभ मिल पा रहा है।
वर्तमान में करीब 300 डॉक्टर रिटायर्ड हो चुके हैं जिनसे रिकवरी चल रही थी। इनकी पेंशन से रिकवरी हो रही है। एक डॉक्टर से करीब 5 से 15 लाख रुपए तक की वसूली होना है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार करीब सवा सौ करोड़ की वसूली इन डॉक्टरों से होना है। डॉ. गोस्वामी ने बताया कि सरकार के इसी रिकवरी आदेश के खिलाफ पहले हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं।




