जीवाजी यूनिवर्सिटी: नाम के आगे लगा था राइट का निशान, 2 से बढ़कर 62 हो गए नंबर

ग्वालियर। फर्जी अंकों के सहारे 24 छात्रों की अंकसूची बनवाए जाने के मामले में अभी जेयू प्रशासन कार्रवाई को अंतिम रूप दे नहीं पाया था कि उससे पहले एक और बड़ा मामला उजागर हो गया। इस बार गोपनीय विभाग के अंक चार्ट में 2 के स्थान पर 62 अंक किए जाने का मामला उजागर हुआ है। परीक्षा नियंत्रक ने चार्ट जब्त कर लिया है। शुक्रवार को पड़ताल होगी कि बिना किसी नोटशीट या आदेश के 2 से 62 अंक किसने और किस आधार पर किए हैं।
गोपनीय विभाग की बीएससी सेल के प्रभारी चरण दास खोइया गुरुवार को अपना सामान्य काम-काज निपटा ही रहे थे कि, उनके पास बीएससी का एक चार्ट वापसी में आया। उन्होंने पड़ताल की तो पता चला कि यह चार्ट मार्कशीट बनने के लिए दूसरे अंकसूची सेल में गया था। इस बात पर उन्हें हैरानी हुई कि करेक्शन वाली अंकसूची बनने के लिए दूसरे सेल में कैसे गई? कारण यह कि बीएससी की जितनी भी अंकसूची में करेक्शन होता है,वह गोपनीय विभाग के अंकसूची सेल में ही बनती है।
राइट के निशान से पकड़ में आया मामला
बिना जानकारी दूसरे विभाग में करेक्शन के साथ अंकसूची बनने के लिए अंक चार्ट जाने की बात सेल प्रभारी चरण दास खोइया के मन में खटकती रही। उन्होंने जब चार्ट को खंगाला तो एक स्थान पर बीएससी पंचम सेम-2015 अनुक्रमांक 3147134 पर छात्र दीपेन्द्र सिंह के नाम के आगे राइट का निशान लगा पाया। इस छात्र के फिजिक्स विषय में अंक 2 से बढ़ाकर 62 किए गए थे। पूरा परिणाम नए सिरे से तैयार किया मिला।
परीक्षा विभाग के चार्ट से खुली पोल
सेल प्रभारी ने अपनी शंका को पुष्ट करने के लिए परीक्षा विभाग के अंक चार्ट को मंगाया। उस चार्ट में फिजिक्स विषय में महज 2 अंक ही दर्शाए हुए थे। यहां यह उल्लेखनीय है कि हर छात्र के अंकों का रिकॉर्ड रखने विश्वविद्यालय में चार्टों को दो प्रतियां होती हैं। एक गोपनीय विभाग और एक परीक्षा विभाग में रखा जाता है। यह चार्ट अलग-अलग विभागों में इसीलिए रखे जाते हैं कि यदि कहीं कोई एक विभाग अंक चार्ट में गड़बड़ी कर भी दे तो उसे पकड़ा जा सके।




