हादसे के बाद भी सबक नहीं : जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार कर रहे लोग

शिवपुरी।  15 अगस्त का वो दर्दनाक मंजर अभी तक लोगों की आंखो के सामने है. लोग अभी तक उस मंजर को भूल नहीं पाए हैं जिसमें सुल्तानगढ़ वॉटर फॉल पर पानी के बहाब ने 9 लोगो को मौत की आगोश में ले लिया था और तीन दर्जन से अधिक लोगों को घंटो अपने भय के साये में रखा था. जिसके बाद मौत से लड़कर कुछ बहादुर नौजवनों ने इन लोगों को बाहर निकाला था. हादसे के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की हिदायत के बाद भी जिम्मेदार डेंजर जोन इलाकों को लेकर संजीदा नही हैं. यहां लोग नदी की धार को चीरकर मौत का सफर कर रहे हैं और प्रशासन है कि इतने गंभीर हादसे होने के बाद भी लापरवाही बरत रहा है.

सिंध नदी के घाट पर पानी का बहाव तेज
कोलारस थाना क्षेत्र की सीमा पर आने वाले ग्राम गोरा टीला पर सिंध नदी के घाट पर पानी का बहाव तेज होने के बाद भी एक बस सवारियों को भरकर नदी पार कर रही है. नदी में पानी का बहाव ज्यादा होने के बाद भी लोग खतरा मोल लेने से बाज नहीं आते. बस के मालिक भी बसों में सवारियां भर-भरकर बसें निकाल रहे हैं. ऐसे में अगर बस नदी के बहाव में बह जाती है तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ऐसे स्थिति में कई लोग गंभीर हादसे का शिकार हो सकते हैं. इसके साथ ही कुछ युवक बाईक को कंधो पर रखकर सिंध नदी पार कर मौत को दाबत दे रहे हैं.

मदद मिलने के आसार भी कम
पानी का बहाव अधिक होने के बाद भी लोग हैं कि सेल्फी और वीडियो के मोह में तेज बहाव के बीच भी खड़े होकर फोटो सेशन कराने लगते हैं. यह जोखिम भरा हो सकता है. लापरवाही के कारण कई जिंदगियां जा सकती हैं. बता दें नदी में तेज बहाव और खतरे के बाद भी इलाके में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नही हैं. ऐसे में अगर कोई भी गंभीर हादसा होता भी है तो यह साफ है कि लोगों को मदद मिलने के आसार भी कम हैं. बता दें पिछले वर्ष भी एक महिला और एक बच्चा ऐसे ही नदी पार करते समय तेज बहाब में बह गये थे. जिसके बाद महिला को तो बचा लिया लेकिन मासूम सिंध के तेज बहाब में बह गया था. ऐसे में लगातार होने वाले हादसों के बाद भी जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं.