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झुग्गी की तंग गलियों से रैंप वॉक तक प्रीति की उड़ान

झुग्गी की तंग गलियों से रैंप वॉक तक प्रीति प्रजापति की उड़ान, पिता मिस्त्री तो बहन सिलती है कपड़े; अब वर्ल्ड रैंप पर उतरने का सपना

भोपाल। कहते हैं कि सपने देखने के लिए बड़ा घर नहीं, बल्कि बड़ा हौसला चाहिए। इस कहावत को भोपाल की 22 वर्षीय प्रीति प्रजापति अपने संघर्ष और जुनून से सच साबित करने में जुटी हैं। रामेश्वरम एक्सटेंशन, लहरपुर की झुग्गी बस्ती में रहने वाली प्रीति कभी अपने घर के सामने की तंग गली में रैंप वॉक किया करती थीं। आज सोशल मीडिया पर उनके वीडियो को लाखों लोग देख रहे हैं और वह मॉडलिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बीच शुरू हुआ उनका यह सफर अब बड़े मंचों तक पहुंचने का सपना बन चुका है।

तीन कमरों के घर से शुरू हुआ मॉडलिंग का सफर

प्रीति का परिवार एक छोटे से तीन कमरों के मकान में रहता है। उनके पिता मोतीलाल प्रजापति मिस्त्री का काम करते हैं, जबकि मां कलिंदा प्रजापति घर संभालती हैं। परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं। घर की आर्थिक परिस्थितियां भले ही सामान्य हों, लेकिन प्रीति के सपने बड़े हैं। कोरोना काल के दौरान उनकी पढ़ाई प्रभावित हुई। इसके बाद उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में आगे बढ़ने का फैसला किया और अपने शौक को पूरा करने के लिए घर से ही शुरुआत कर दी।

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बहन ने सिले कपड़े, गली बनी रैंप

प्रीति की कहानी की सबसे खास बात यह है कि उनके शुरुआती सफर में उनकी बहन रेखा प्रजापति ने अहम भूमिका निभाई। जब बड़े मंच और महंगे डिजाइनर कपड़े उपलब्ध नहीं थे, तब बहन ने अपने हाथों से उनके लिए कपड़े सिलने शुरू किए। घर के सामने की गली ही प्रीति का रैंप बन गई। इसी गली में उन्होंने रैंप वॉक का अभ्यास किया और अपने वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने लगीं। धीरे-धीरे उनके वीडियो लोगों तक पहुंचने लगे और उन्हें पहचान मिलने लगी। आज प्रीति कई बड़े रैंप वॉक कार्यक्रमों में भी नजर आ रही हैं।

बेटी का नाम रोशन होते देख खुश हैं माता-पिता

प्रीति की मां कलिंदा प्रजापति का कहना है कि बेटी को आगे बढ़ते देखकर उन्हें बहुत खुशी होती है। परिवार हमेशा उसका साथ देता है और वे चाहते हैं कि प्रीति अपने जीवन में और आगे बढ़े। मां के मुताबिक, बेटी की मेहनत और पहचान परिवार के लिए गर्व की बात है। वहीं, पिता मोतीलाल प्रजापति भी बेटी के सपनों के साथ खड़े हैं। उनका कहना है कि वह अपनी बेटी को पूरा सहयोग देते हैं और चाहते हैं कि वह आगे बढ़कर परिवार का नाम रोशन करे। परिवार के समर्थन ने प्रीति के आत्मविश्वास को मजबूत किया है और वह अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास कर रही हैं।

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पहले पड़ोसी करते थे सवाल, अब कर रहे तारीफ

प्रीति के इस सफर में आसपास के लोगों की सोच भी बदली है। पड़ोसियों के मुताबिक, जब प्रीति ने गली में रैंप वॉक करना शुरू किया था, तब वे उससे पूछते थे कि वह यह सब क्यों कर रही है। लेकिन अब उसकी बढ़ती पहचान देखकर उन्हें खुशी होती है। पड़ोसियों का कहना है कि प्रीति जिस तरह अपने हुनर को आगे बढ़ा रही है, वह सराहना के काबिल है।

बहन भी देख रही है फैशन डिजाइनर बनने का सपना

प्रीति की बहन रेखा प्रजापति न सिर्फ उसके लिए कपड़े सिलती हैं, बल्कि खुद भी फैशन डिजाइनर बनने का सपना देखती हैं। रेखा का कहना है कि बहन को आगे बढ़ते देखकर उन्हें बेहद खुशी होती है। वह चाहती हैं कि प्रीति लगातार मेहनत करे और मॉडलिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाए। इस तरह दोनों बहनें अपने-अपने हुनर और सपनों को साथ लेकर आगे बढ़ रही हैं।

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पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन, लक्ष्य वर्ल्ड रैंप

22 वर्षीय प्रीति ने पॉलिटिकल साइंस विषय से ग्रेजुएशन किया है। पढ़ाई के साथ अपने शौक को पहचान में बदलने की कोशिश कर रहीं प्रीति का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर रैंप वॉक करना है। वह चाहती हैं कि उन्हें दुनिया के बड़े मंचों पर अपना हुनर दिखाने का मौका मिले और उनके परिवार का नाम रोशन हो। प्रीति की कहानी सिर्फ मॉडलिंग तक पहुंचने की कोशिश नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों में अपने सपनों को जिंदा रखने की मिसाल भी है। एक तरफ पिता की मेहनत से चलता परिवार, दूसरी तरफ बहन के हाथों से सिले कपड़े और घर के सामने की गली में शुरू हुआ अभ्यास—इन सबने प्रीति के सफर को खास बना दिया है। लहरपुर की तंग गलियों से दुनिया के रैंप तक पहुंचने का सपना देखने वाली प्रीति प्रजापति की उड़ान अभी जारी है। अब उनकी नजरें उस बड़े मंच पर हैं, जहां उनका हुनर उन्हें नई पहचान दिला सके। उनकी कहानी यही संदेश देती है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन हौसला बड़ा होना चाहिए।