कोर्ट से निकलते ही मारी गोली, मौके पर ही तोड़ा दम

ग्वालियर। 5 मई को अभिषेक की बहन की शादी है। उसकी तैयारियों में वह लगा था। दो महीने से उसे अपने ऊपर किसी बड़े हमले की आशंका थी। जिस कारण वह ज्यादातर घर में ही रहता था। जब भी घर से निकलता था तो किसी न किसी को साथ लेकर निकलता था। साथ ही अपने इंतजाम से निकलता था। पर मंगलवार को कोर्ट में पेशी के चलते वह पूरी तरह निहत्था था।

कोर्ट में गवाही देने के बाद निकलते समय साथियों से कहा भी था कि देखना कोई अपनी फिल्डिंग न लगा दे। ऐसा ही हुआ वह तानसेन नगर गेट के पहले ही पहुंचा था कि एक एटीएम के पास साथी ने कुछ पल के लिए उसका साथ छोड़ा और रैकी कर पीछे लगे बदमाशों ने उसे गोलियों से भून दिया। बिना किसी तैयारी के आगे पीछे खड़े साथी सिर्फ तलाशा देखने के सिवाय कुछ नहीं कर पाए। हमलावरों ने पिस्टल से लगभग तीन मिनट में 7 गोलियां चलाई हैं।

बुलट से उतर तक नहीं सका अभिषेक-

घटना को रैकी कर पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया गया है। प्लानिंग इतनी सटीक थी कि अभिषेक के साथ चल रहे दोस्तों को भी बचाने का मौका नहीं मिला। जिस समय अभिषेक पर हमला हुआ वह बुलट पर बैठा था। बदमाशों ने करीब आकर कनपटी पर गोली मारी। वह बुलट सहित ही नीचे गिर गया। इसके बाद एक पिस्टल से उस पर गोलियां बरसाता रहा।

दोस्त ने यह सुनाई कहानी-

अभिषेक के दोस्त राघवेन्द्र सिंह ने कहानी सुनाई है कि घटना के समय वह बुलट पर अभिषेक के साथ बैठा था। सफारी कार और अपाचे बाइक से बदमाश आए चलती गाड़ी पर अभिषेक को गोली मारी। इसके बाद कई गोली मारी। हमला करने वालों में उसने पंकज सिकरवार, सोनू राठौर, वीरू तोमर, ओमकार राठौर, ओमकार उर्फ भूरा सिकरवार, रविन्द्र सिकरवा, अमित और विजय भदौरिया के नाम लिए हैं।

यहां कहानी पर संदेह-

पुलिस राघवेन्द्र की कहानी को सही से नहीं समझ पा रही है। जब वह अभिषेक के साथ था तो उसे क्यों छो़ड़ा गया। वह अभिषेक के इतने करीब था तो उसे भी घायल होना था। उसने बचाने का प्रयास क्यों नहीं किया। हमलावर उसे जानते थे और वह हमलावरों को तो ऐसे में वह कैसे बच गया।

एक कहानी यह भी-

घटना स्थल के पास कुछ लोगों से बात की तो एक नई कहानी सामने आई है। घटना के समय वहां से निकल रहे एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिल्वर रंग की बुलट पर अभिषेक खड़ा था। उसका साथी शायद एटीएम से कैश निकालने गया। इसी समय काले रंग की बुलट से दो लोग आए। एक कुछ आगे बुलट को ऑन करके खड़ा रहा। दूसरे ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। हत्या करने के बाद बुलट पर सवार होकर निकल गए।

हत्या में शॉर्प शूटर का उपयोग-

घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस को 7 गोलियां चलने का पता लगा। मौके से 6 खोके और दो गोलियां मिली हैं। 6 खोके मिलने का मतलब है कि सातवां खोका पिस्टल के चेंबर में होगा। जिस तरह घटना को अंजाम दिया गया है और गोली सटीक कनपटी में मारी गई है। इस तरह से यूपी के अलीगढ़ की तरफ से आने वाले शॉर्प शूटर करते हैं। पुलिस इस दिशा में भी काम कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज से हो सकता है खुलासा-

पुलिस ने घटना स्थल से लेकर कोर्ट तक के बीच के सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग भी देखना शुरू कर दी है। ऐसी आशंका है कि बदमाश कोर्ट से रैकी कर रहे थे। यदि ऐसा है तो रास्ते में कहीं तो पीछे आते दिखेंगे।

दोनों पक्षों में चल रहा है गैंंगवार-

घटना के बाद मृतक के कुछ करीबियों ने बताया कि अभिषेक की मौत गैंगवार के चलते हुई है। हमला करने वाले टिंकू गैंग के सदस्य हैं। जबकि अभिषेक, परमाल दूसरे खेमे के हैं। अभी विनोद गैंग भी उनको मदद कर रही है। अभिषेक के साथी रमन चौहान ने एक मामले में टिंकू के खिलाफ गवाही दी है। जिसके बाद से लगातार धमकियां मिल रही थी।

संदेही पकंज सिकरवार और अभिषेक के बीच भी लम्बे समय से गैंगवार चला आ रहा है। अक्टूबर 2017 में गदाईपुरा रमन चौहान, अभिषेक तोमर व दूसरी तरफ से पंकज सिकरवार पार्टी के बीच आमने सामने से 30 से अधिक गोलियां चली थीं। इसके बाद फिर एक बार दोनों ग्रुप आमने सामने हुए। 26 अक्टूबर को रमन के साले संदीप सिकरवार पर सिकरवार पार्टी ने हमला किया था।

छात्र सूरज की हत्या में था नामजद-

मृतक अभिषेक तोमर पर सबसे बड़ा मामला वर्ष 2014 में छात्र सूरज भदौरिया की हत्या का था। छात्र को उसकी बहन के सामने गोली मारने का आरोप था। इस मामले में अभिषेक तोमर व साथी परमाल सिंह पर हत्या का मामला दर्ज था। इसी मामले में राजीनामा करने के लिए गोली चलाने पर हत्या के प्रयास का मामल दर्ज है। इसी मामले में उस पर फरार होने पर 5 हजार का इनाम हुआ था।

मौत की खबर सुनते ही एक पिता ने बनाई दाढ़ी-

जैसे ही क्षेत्र में अभिषेक की मौत की खबर उड़ी तो उपनगर ग्वालियर के एक 50 वर्षीय पिता ने अपनी बढ़ती दाढ़ी को कटवाया। ऐसा पता लगा है कि युवक के बेटे की मौत के लिए वह अभिषेक को जिम्मेदार मानता था। बेटे की मौत के बाद से ही उसने कसम खाई थी कि वह अभिषेक को सजा दिलाने के बाद ही अपने दाढ़ी के बाल बनवाएगा। जब मंगलवार शाम उसे अभिषेक की हत्या का पता लगा तो उसने अपनी दाढ़ी बना ली। अब यह कौन है और उसने ऐसा क्यों किया इसकी पुलिस के पास कोई पुष्टि नहीं है।

बहन की शादी की तैयारियों में लगा था-

परमाल के पिता श्याम सिंह पीएचई में कर्मचारी हैं। जिस कारण वह हजीरा के पीएचई कॉलोनी में रहते हैं। पांच बहनों में अभिषेक इकलौता भाई है। मां विमलेश हैं। बड़ी बहन शबनम गुना जेल में प्रहरी है। पर मंगली होने के कारण उसका विवाह नहीं हुआ है। 5 मई को अभिषेक की बड़ी बहन संध्या की शादी होनी है। उसी को लेकर वह काफी तैयारियां कर रहा था।