पर्यटकों को पुलिस डकैतों के स्थान तक खुद ले जाएगी!

श्योपुर एसपी ने खास योजना बनाई है। इस खास योजना में अब आप भी डकैतों के ठिकाने देख सकेंंगे । पुलिस की ओर से फरवरी के अंतिम सप्ताह में यह योजना शुरू की जाएगी। मतलब पुलिस डकैतों के स्थान तक आपको खुद ले जाएगी।

श्योपुर। कुख्यात डकैत रहे रमेश सिकरवार, पान सिंह तोमर, रामबाबू-दयाराम गड़रिया गिरोह जैसे दुर्दांत डकैतों की जंगल, खोह और कंदराओं में आमदरफ्त होती रही थी उन स्थलों को पुलिस-प्रशासन पर्यटक केन्द्रों के रूप में विकसित करेगा। इसके लिए फरवरी के अंतिम सप्ताह में सैलानियों को इन स्थलों तक ले जाया जाएगा और उन्हें डकैतों का इतिहास भी बताया जाएगा।

पुलिस ने यह कार्ययोजना इसलिए बनाई है क्योंकि श्योपुर अब भयमुक्त जिला हो चुका है। पिछले एक साल से श्योपुर जिले में कोई नामजद डकैत गिरोह भी नहीं रहा और छुटभय्यै गिरोह भी काल कवलित हो चुके हैं।

यह गिरोह कैसे और कहां शरण लेते थे, इनकी सुरक्षा चौकियां किस तरह काम करती थीं और पुलिस को आता देखकर इनके भाग निकलने के रास्ते क्या थे? इन्हीं चीजों को भी सैलानियों को बताया जाएगा।

श्योपुर पुलिस अधीक्षक डॉ.शिवदयाल सिंह ने बताया कि देश-दुनियां में आज भी डकैतों के किस्से बढ़े चाव से पढ़े और सुने जाते हैं। चूंकि श्योपुर अब डकैत विहीन हो चुका है तो क्यों न हम इनके ठिकानों तक सैलानियों को ले जाएं और ऐसे स्थलों को दिखाएं । मालूम हो कि कुख्यात डकैत रमेश सिकरवार एक जमाने में इसके द्वारा नोन घाटी में बस लूटकर एक दर्जन लोगों को अपहृत कर ले गया था तो गड़रिया गिरोह ने भी यहां शिवपुरी के जंगलों से होकर लंबे समय तक अपना ठिकाना बनाकर रखा था।

वादियों में हैं ठिकानें, पानी का भी इंतजाम
फिलहाल पुलिस ने कराहल के कूनो क्षेत्र कैमाखोह स्थल तलाशा है। यहां नामचीन डकैत अपने गिरोह के साथ रहे हैं। कराहल की वादियों में यहां डकैत गिरोह आसानी से छुपकर रहते थे और समय काटते थे। कैमाखोह यहां कराहल में एक सुन्दर स्थान हैं। वादियों में स्थित होने के कारण यहां का प्राकृतिक सौन्दर्य तो देखते ही बनता है । प्यास बुझाने के लिए कूनो नदी भी है।

पुलिस ही ले जाएगी लोगों को
इन ठिकानों तक पुलिस ही सैलानियों को ले जाएगी। इसके लिए साप्ताहिक कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। आमजन, स्कूली छात्र तथा पर्यटन में रुचि रखने वालों को इन स्थानों पर ले जाने की योजना है। मालूम हो कि डकैतों की शरण स्थली वाले कई स्थान अब कूनो अभ्यारण्य की जद में समा चुके हैं। जो ठिकाने इस दायरे में नहीं आए वे सामान्य वन मंडल के क्षेत्र में हैं।