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विराट मानस सम्मेलन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

विराट मानस सम्मेलन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़।

सिद्ध श्री रामसती आश्रम आंढर में विद्वान सुना रहे हैं रामकथा।

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करैरा, विकास खण्ड करैरा के ग्राम आंढर में सिद्ध श्री रामसती आश्रम विकास समिति द्वारा प्रतिबर्ष की भांति आश्रम पर अनंत विभूषित श्री सब्जी वाले बाबा की तेतालीसबीं पुन्यतिथि पर विराट मानस सम्मेलन धूमधाम से मनाया जा रहा है जिसमें विभिन्न आयोजन 3 फरवरी से प्रारंभ हो गये हैं रविवार 3 फरवरी से श्री मद्भागवत का पाठ चल रहा है, सोमवार 4 फरवरी से अखण्ड रामायण का पाठ ,
5 फरवरी से प्रति दिन ज्ञानोपदेश प्रवचन दिन में 11बजे से 5बजे तक होंगे प्रवचन हेतु पं०श्री सुरेंद्र कुमार तिवारी मानस प्रसून एवं श्रीमद्भागवत प्रवक्ता गुरसराय, कथावाचक सुश्री मंदाकिनी जी ग्वालियर तथा प्रवक्ता श्री बजरंग दास जी मानस महारथी दतिया द्वारा किए जा रहे हैं ।

मानस सम्मेलन में कथा में कथा वाचक संत श्री समरथदास महाराज,पं श्री सुरेन्द्र कुमार तिवारी मानस प्रसून गुरसराय, कथावाचक सुश्री मंदाकिनी जी ग्वालियर,मानस प्रवक्ता श्री बजरंग दास जी मानस महारथी दतिया ने जीवन को सुखी बनाने के आधार रामचरितमानस के माध्यम से समझाए। बजरंग दास जी ने कहा कि रामकथा क्या है? सबसे पहले यह समझने की कोशिश करें, शुरुआत इस बुनियादी सवाल से करें. उत्तर के लिए उन रामकथाओं को पढ़ने की ज़रूरत नहीं जिनकी संख्या गिनाते समय- ‘रामायण शतकोटि अपारा’ या फिर ‘हरि अनंत हरिकथा अनंता’ जैसी समझावनों का सहारा लिया जाता है.

रामकथा का रिश्ता लोकमानस से है, उसके सुख-दुःख, आस-निराश से है तो ‘रामकथा क्या है’ जैसे प्रश्न का उत्तर किताबों से ज्यादा लोक व्यवहारों में खोजा जाना चाहिए.
ज़्यादा दिन नहीं हुए इस देश में लोग एक-दूसरे का अभिवादन, ‘प्रणाम’ और ‘नमस्कार’ की जगह ‘राम-रामजी’ या ‘जै रामजी की’ कहकर किया करते थे. बुंदेलखंड में तो आज भी राम-राम कहकर ही अभिवादन करते हैं। एक-दूसरे से भेंट-मुलाकात होने पर कुशल-क्षेम के नाम पर दो जन अपनी-अपनी ‘रामकहानी’ सुनाने में जुट जाते थे.
अभिवादन में जै रामजी और कुशल-क्षेम के रूप में अपनी-अपनी रामकहानी कहने के इन दो व्यवहारों से एक अर्थ झांकता है. एक तो यह कि राम स्मरणीय हैं, इस हद तक कि दो जन आपस में मिलें तो मुलाकात की शुरुआत रामनाम के उच्चारण से हो.
दूसरा अर्थ है, राम की कोई कहानी है- ऐसी कहानी जिससे व्यक्ति की आपबीती का कोई रिश्ता है. ऐसा रिश्ता कि राम की कहानी कहने का मतलब किसी से अपनी आपबीती कहना हो जाता है.
अपनी आपबीती को कुछ इस अंदाज़ में कहना कि क्या जैसे राम या फिर रामकथा से जुड़े किसी अन्य पात्र ने सहा वैसा मैं भी सह रहा हूं और यह तौलते हुए कहना कि क्या जैसे राम या उस कथा के किसी और पात्र ने रिश्ते को निभाया उसी तरह मैं भी निभा रहा हूं? रामकथा में आपबीती होने की क्षमता है, वह इसी क्षमता के कारण लोककथा बनती है। मानस सम्मेलन में आए श्रद्धालुओं ने रामसती आश्रम की आयोजन संयोजिका सुश्री रामसती देवी जी के सानिध्य में कथा में धर्मलाभ लिया।
कार्यक्रम का संचालन करैरा के प्रसिद्ध गीतकार घनश्याम योगी ने किया।

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