नशे की हालत में वहशी बने दुष्कर्मी, पहले भी कर चुके हैं वारदातें

मंदसौर । मासूम बच्ची से हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद लोगों में काफी नाराजगी है। लेकिन इस तरह का ये अकेला मामला नहीं है। नशे की हालत में दरिंदे पहले भी मासूमों को अपनी हैवानियत का शिकार बना चुके हैं। पुलिस ने हालांकि अपराधियों को पकड़ लिया है लेकिन इन घटनाओं के मूल कारण को लेकर पुलिस की उदासीनता बड़ा कारण सामने आ रहा है। पुलिस उस नशे पर लगाम नहीं कस पा रही जिसके चलते मासूमों से पहले दुष्कर्म और फिर उनकी हत्या हो रही है।

आपको बता दें कि मंदसौर में 8 साल की मासूम बच्ची से सामूहिक दुष्कर्म हुआ। पुलिस ने इस मामले में इरफान ऊर्फ भय्यू और आसिफ नाम के 2 आरोपियों को हिरासत में लिया। मंदसौर पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी नशे के आदी हैं और नशे की हालत में ही उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया था।

पुलिस के रिकॉर्ड भी बताते हैं कि शराब, चरस और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के बाद अपराधी इस तरह के घिनौने अपराधों को अंजाम देते हैं। अपराधी शराब के साथ नाइट्रावेट दवा का सेवन भी बड़े पैमाने पर करते हैं। इंदौर में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं जिनमें नाइट्रावेट के सेवन की बात सामने आई। शराब के साथ नाइट्रावेट के सेवन से अपराधी दरिंदगी की हदें पार कर गए और उन्होंने मासूम बच्चियों से दुष्कर्म कर निर्दयीता से उनकी हत्या भी की।

4 माह की बच्ची बनी शिकार

दरिंदगी का एक ऐसा ही मामला कुछ समय इंदौर के राजबाड़ा इलाके में सामने आया। 20 अप्रैल 2018 को 4 महीने की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी। नवीन गड़के नामक वहशी ने बच्ची की मां से बदला लेने के लिए महज 4 महीने की बच्ची से दुष्कर्म किया। आरोपी इस नन्हीं जान को एक इमारत के बेसमेंट में ले गया और वहां 15 मिनट तक नोंचता रहा। फिर बिल्डिंग की छत से बच्ची को फेंक दिया। आपको बता दें कि आरोपी नवीन रिश्ते में पीड़ित बच्ची का मौसा लगता था लेकिन नशे की हालत में उसने हैवान को भी छोटा साबित कर दिया।

4 साल की शिवानी भी हुई शिकार

इसी तरह 24 जून 2012 को पंचम की फेल क्षेत्र में बारात देख रही 4 साल की शिवानी को 3 दरिंदे उठाकर ऑटो रिक्शा में ले गए थे। नशे में ही बच्ची से ज्यादती की और हत्या कर मालवीय नगर के नाले में फेंक दिया। पुलिस ने इस मामले में जितेंद्र, केतन और सन्नी को गिरफ्तार किया था। 26 अप्रैल 2013 को तीनों को कोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाई गई।

दरिंदगी के अन्य मामले

– इसी तरह सितंबर 2010 में मल्हारगंज इलाके में आदेश उर्फ तपेली ने नाइट्रावेट के नशे में सारिका नामक बच्ची से से ज्यादती की और नाले में डूबोकर उसकी हत्या कर दी। तपेली इस बच्ची को रात के अंधेरे में घर से उठा ले गया था।

– अप्रैल 2010 क्लर्क कॉलोनी में सचिन उर्फ सलमान व अन्य तीन आरोपियों ने नाइट्रावेट, शराब और चरस के नशे में राजेश मालाकार, पत्नी सुनीता, बेटे हार्दिक और बेटी वंदना का कत्ल किया। आरोपियों की सुनीता पर बुरी नजर थी और आरोपियों ने सुनीता का बलात्कार भी किया था। पुलिस ने इस मामले में टोना उर्फ राजेन्द्र गौतम, पप्पी उर्फ पपिया उर्फ विकास राठौर, सचिन उर्फ सलमान उर्फ गोलू चौहान और विजय कुशवाह को हिरासत में लिया।

शराब के साथ सेवन पर इंसान को हैवान बना देती है नाइट्रावेट

दरअसल नाइट्रावेट का इस्तेमाल इन्सोमेनिया यानि अनिंद्रा की बीमारी के इलाज के लिए किया जाता है। इसे नाइट्राजेपाम नामक ड्रग से बनाया जाता है। ये दवाई शेड्यूल H ड्रग्स की श्रेणी में आती है। मनोचिकित्सक डॉ. रामगुलाम राजदान बताते हैं कि अनिंद्रा की बीमारी के लिए यह अच्छी दवा है लेकिन शराब या अल्कोहल के साथ लेने पर इसक असर एकदम उल्टा हो जाता है। अल्कोहल के साथ इसे लेने पर नींद गायब हो जाती है और दिमाग की नसों में खून के बहाव काफी तेज होकर ये व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर देता है।

पुलिस के लिए चुनौती

गौरतलब है कि दवा की दुकान पर 2 रुपए में मिलने वाली नाइट्रावेट की छोटी-सी गोली का आतंक सामने आने के बाद भी पुलिस करीब 10 सालों से इसका समाधान नहीं खोज पाई है। नाइट्रावेट गोली के सेवन के बाद इंदौर के अपराधी पिछले 10 साल में 50 से लोगों की जान ले चुके हैं जबकि 100 से भी ज्यादा लोगों को घायल कर चुके हैं। इनमें बच्चियों से दुष्कर्म कर उनकी हत्या के कुछ संगीन मामले भी शामिल हैं।