हंगामे के चलते 7 दिन पहले ही विधानसभा का सत्र अनिश्चितकाल के लिये स्थगित, मंत्री नोरोत्तम मिश्रा ने दिया जवाब

भोपाल। विधानसभा में बुधवार को करीब साढ़े तीन घंटे सदन में सिर्फ हंगामा हुआ। हंगामे की वजह बना लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह की पुत्रवधू प्रीति रघुवंशी की आत्महत्या का मामला। सदन में न तो प्रश्नकाल हुआ और न ही शून्यकाल। कांग्रेस ने कार्यवाही शुरू होते ही काम रोककर चर्चा कराने की मांग उठा दी। सत्तापक्ष ने विरोध किया। हंगामा और शोर-शराबे के कारण मात्र सात मिनट में ही कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

कांग्रेस विधायक गर्भगृह में आकर सरकार और मंत्रियों के खिलाफ नारेबाजी करते रहे तो भाजपा विधायक कांग्रेस के खिलाफ। इसी दौरान कांग्रेस ने बड़ा कदम उठाते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव विधानसभा सचिवालय में लगा दिया। इससे माहौल और गरमा गया। हंगामे के बीच अध्यक्ष ने आधा घंटे में ही छह दिन का सरकारी काम पूरा कराया और संसदीय कार्यमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के प्रस्ताव पर सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। नेता प्रतिपक्ष ने सदन में हुए घटनाक्रम को प्रदेश के इतिहास का काला दिन बताया।

प्रश्नकाल शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, रामनिवास रावत, आरिफ अकील और डॉ. गोविंद सिंह ने स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करने का अनुरोध किया। इसको लेकर संसदीय कार्यमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आपत्ति उठा दी। उन्होंने कहा कि मंगलवार को भी कांग्रेस ने इसी तरह प्रश्नकाल नहीं चलने दिया था। विपक्ष सदन चलाना ही नहीं चाहता है। जिस विषय पर सबकुछ हो चुका है, उसे बिना मतलब उठाया जा रहा है। इस पर रावत ने कहा कि पीड़ित परिवार को धमकाया जा रहा है। पलटवार करते हुए डॉ. मिश्रा बोले कि क्या थाने में कोई रिपोर्ट डाली गई है। सिर्फ असत्य बातें कही जा रही हैं। सदन को राजनीति का अखाड़ा बनाया जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच जब तीखी बहस होने लगी तो कांग्रेस के सचिन यादव सहित अन्य विायक गर्भगृह में आ गए। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष ने कार्यवाही दस मिनट के लिए स्थगित कर दी।

दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो फिर काम रोककर चर्चा कराने की मांग उठने लगी और शोर-शराबा बढ़ता देख अध्यक्ष ने 12 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। इस दौरान रामनिवास रावत और डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बीच तीखी बहस हो गई। डॉ. मिश्रा ने कहा कि विपक्ष का व्यवहार अमर्यादित है। अध्यक्ष ने भी कहा कि आप विधायकों के विशेषाधिकार का हनन नहीं कर सकते हैं। तीसरी बार अध्यक्ष ने सदन का काम शुरू कराने की कोशिश की लेकिन दोनों पक्षों से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला नहीं थमा। इस पर तीसरी बार दो बजे तक के लिए कार्यवाही को स्थगित कर दिया। चौथी बार भी जब विवाद नहीं रुका तो अध्यक्ष ने एकतरफा कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए सरकारी कामकाज निपटवाया और संसदीय कार्यमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के प्रस्ताव पर सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

जब रामपाल ने स्वीकार कर लिया बहू तो बचा क्या

संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि जब रामपाल सिंह ने प्रीति रघुवंशी को बहू स्वीकार कर लिया तो फिर बचा क्या। कांग्रेस सदन की कार्यवाही को बाति करने की कोशिश कर रही है। इनकी चर्चा कराने में रुचि नहीं है। जनता इन्हें जवाब देगी। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में चर्चा होनी थी पर सब हंगामे की भेंट चढ़ गया।

फिर आमने-सामने आए मिश्रा-सिंह

सदन में एक बार फिर संसदीय कार्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने आ गए। तीसरी बार सदन की कार्यवाही शुरू होने पर डॉ. मिश्रा ने व्यवस्था का प्रश्न उठा दिया। इस पर नेता प्रतिपक्ष भी खड़े हो गए और कहा कि पहले मुझे बोलने का मौका मिलना चाहिए, क्योंकि जब सदन की कार्यवाही स्थगित हुई थी तब मैं खड़ा था। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि पहले डॉ. मिश्रा खड़े हो गए थे, इसलिए पहले वे फिर नेता प्रतिपक्ष और बाद में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव बोलेंगे। इस बात को लेकर फिर हंगामा होने लगा और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।