अंतरात्मा की आवाज नहीं सुन रहे कर्मचारी- जानिये क्या है पूरा मामला

वेब डेस्क। मध्यप्रदेश में अधिकारी-कर्मचारी अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। नवगठित आनंद विभाग ने सभी जिलों में शासकीय कर्मचारियों के लिए सप्ताह में एक घंटे अंतरमन में झांकने का ‘अल्प विराम” कार्यक्रम शुरू किया है। व्यक्तित्व में बदलाव लाने वाली इस गतिविधि में छह-सात जिलों को छोड़ बाकी जगह लोगों ने भागीदारी ही नहीं की।

मप्र ने सरकार इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को देशभर के दार्शनिक और विशेषज्ञों की राय-सलाह के बाद शुरू कराया है। प्रदेश के सभी 51 जिलों में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी स्तर के अधिकारी को नोडल अफसर बनाया है। उसकी निगरानी में आनंदम सहयोगी सप्ताह में एक दिन कर्मचारियों से ‘अल्प विराम” कराते हैं।

भोपाल रहा फिसड्डी

भोपाल के अधिकारी-कर्मचारी भी इस कार्यक्रम में फिसड्डी साबित हुए हैं। उन्होंने स्वयं के भीतर बदलाव लाने के प्रयास को महत्व नहीं दिया। प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर जिले के कर्मचारियों ने विशेष रुचि दिखाई है। शाजापुर, छतरपुर, विदिशा और अशोकनगर जिले का काम भी प्रदेश स्तर पर सराहा गया।

ऐसे सुनते हैं अंतरात्मा की आवाज

‘अल्प विराम” कार्यक्रम एक तरह का ध्यान है, जिसमें दावा किया जाता है कि कोई भी व्यक्ति अंतरात्मा की आवाज

सुन सकता है। इसमें शांत चित्त होकर बैठने और अपने अंतरमन में झांकने का अभ्यास कराया जाता है। लगातार

अभ्यास के बाद व्यक्ति का खुद से संवाद स्थापित होने लगता है। इनीशिएटिव ऑफ चेंज पंचगनी के विशेषज्ञों का

दावा है कि इस प्रक्रिया से अच्छे नतीजे निकलते हैं, जिस तरह दर्पण की धूल पोंछने से प्रतिबिंब साफ दिखने लगता है उसी तरह अंतरात्मा की आवाज सुनाई पड़ने लगती है जो कि हमेशा व्यक्ति को सही राह दिखाती है।

समीक्षा बैठक में हुआ खुलासा

इंदौर, छतरपुर और शाजापुर के कतिपय कर्मचारियों ने बताया कि हाल ही में प्रदेश स्तर पर हुई समीक्षा में यह स्थिति सामने आई। सरकार के तमाम प्रयास और प्रोत्साहन के बावजूद अधिकारियों-कर्मचारियों ने अपने भीतर बदलाव की दिलचस्पी नहीं दिखाई। विभागीय अफसर अब इस मशक्कत में लगे हैं कि कार्यक्रम को सफल कैसे बनाएं। जिन जिलों में अच्छा काम हुआ है, उन्हें और प्रोत्साहित किया जाएगा।