सरकार की पहल : बड़ी उम्र के बच्चों को भी मिलेगी माता-पिता की गोद

इंदौर। पैदा होते ही जिन्हें समाज ने ‘अनाथ’ नाम दे दिया अब उन्हें भी माता-पिता का प्यार और दुलार मिल सकता है। भले ही अब तक निसंतान दंपतियों की उन पर ‘नजर’ नहीं पड़ी लेकिन अब सरकार की मेहरबानी से इन्हें भी परिवार की छाया मिल सकेगी। अब अनाथालयों में रह रहे सैकड़ों निराश्रित बच्चों को गोद मिलने की उम्मीद जागी है। 18 वर्ष से कम उम्र के सभी अनाथ बच्चों को जरूरतमंद परिवारों को गोद देने की तैयारी की जा रही है।

महिला सशक्तीकरण विभाग द्वारा शहर के शिशु गृह व अनाथालयों में रहने वाले बच्चों की सूची तैयार की जा रही है जो जरूरतमंद परिवारों को गोद दे सकते हैं। सरकारी लापरवाही या संस्था में उनके पुनर्वास पर ध्यान न दिए जाने के कारण कई बच्चों की उम्र बढ़ती गई। समाज के दान और सरकारी अनुदान की राशि से उनकी जिंदगी तो कट रही है लेकिन माता-पिता के सुख से वंचित रह गए। हाल ही में सरकार ने ऐसे बच्चों को सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (कारा) वेबसाइट के माध्यम से गोद देने का निर्णय लिया है।mandihalchal

इसे भी पढ़ें  भारत की स्ट्राइक के बाद सीमा पार पाक सेना का जमावड़ा

इसकी तैयारी भी शुरू हो चुकी है। शहर में राजकीय बाल संरक्षण आश्रम, संजीवनी, मातृछाया, श्रद्धानंद बाल आश्रम सहित कई रजिस्टर्ड संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को कानूनी रूप से निराश्रित घोषित कर गोद दिया जा सकेगा। ऐसे 200 से ज्यादा बच्चे हैं जिन्हें इस पहल से माता-पिता का प्यार मिल सकेगा।

18 के बाद छिन जाती है सरकारी छत

शिशु गृह में 18 वर्ष तक के ही बच्चों को रखने का प्रावधान है। संस्थाओं में अनाथ बच्चों की स्कूली पढ़ाई तो हो जाती है लेकिन 18 के बाद उन्हें संस्था से बाहर जाना पड़ता है। इसके बाद उनके लिए आश्रय की कोई जगह नहीं रहती। ऐसे में मजबूरी में लड़की की शादी कर दी जाती है और लड़कों को अपने स्तर पर छत का इंतजाम करना पड़ता है। ऐसे हालात में बच्चों का भविष्य बनने के बजाय अंधकार में चला जाता है। वे दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाते हैं।

इसे भी पढ़ें  राजधानी सहित उत्तर भारत मे भूकंप, जानमाल का नुकसान नहीं

बच्चों का भविष्य सुधरेगा

विभागीय स्तर पर तैयारी चल रही है। पात्र बच्चों को बाल कल्याण समिति द्वारा विज्ञापन जारी कर कानूनी रूप से निराश्रित घोषित करवाया जाएगा। इसके बाद बच्चा दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में शामिल हो सकेगा। इससे बच्चों का भविष्य भी सुधरेगा और निसंतान दंपती को बच्चा भी मिल जाएगा। इससे बड़ी उम्र के बच्चों को फायदा होगा। परिवार की जांच-पड़ताल के बाद ही बच्चा गोद दिया जाता है। – डॉ. मंजुला तिवारी, उपसंचालक, महिला सशक्तीकरण, इंदौर संभाग

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *