MP में 1 लाख हेक्टेयर धान की फसल पर बारिश का खतरा, सिर्फ 15% कटाई
MP में किसानों पर मौसम की मार! 1 लाख हेक्टेयर में खड़ी धान की फसल पर बारिश का खतरा
ग्वालियर-चंबल | मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल में बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल पर बारिश और तेज हवाओं का खतरा मंडरा रहा है। हालात यह हैं कि एक लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की फसल अभी कटाई का इंतजार कर रही है, जबकि अब तक महज 15 प्रतिशत फसल ही खेतों से निकलकर किसानों के घरों तक पहुंच पाई है।

देरी से कटाई बनी किसानों की परेशानी
इस बार धान की रोपाई देर से होने के कारण कटाई का काम भी प्रभावित हुआ है। अंचल के कई इलाकों में किसान खेतों में पक चुकी फसल काटने में जुटे हैं। इसी बीच मौसम के अचानक बदलने और बारिश होने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
किसानों को आशंका है कि बारिश से खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान हो सकता है। वहीं, जिन किसानों ने फसल काटकर खेतों में रखी है, उनके लिए भी परेशानी बढ़ गई है। बारिश के पानी से धान के दाने काले पड़ने और उनकी चमक खराब होने का खतरा है। इससे उपज की गुणवत्ता और बाजार में मिलने वाले भाव पर असर पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों ने दी जरूरी सलाह
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह ने किसानों को सलाह दी है कि कटाई के बाद खेतों में रखी धान की फसल को जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। फसल को मजबूत तिरपाल से ढंककर रखें, ताकि बारिश का पानी सीधे उस पर न पड़े। जिन खेतों में पानी भर गया है, वहां से पानी की निकासी तत्काल करें।
पिछले साल जैसी स्थिति का डर
किसानों को पिछले साल का अनुभव भी परेशान कर रहा है। कटाई के समय बारिश होने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। इस बार भी कटाई में देरी और मौसम की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
अब किसानों की निगाहें मौसम पर टिकी हैं। यदि बारिश का दौर जारी रहता है तो धान की कटाई और सुरक्षित भंडारण दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

