ट्रंप का फैसला भारत की बढ़ा सकता है मुश्किलें

इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा येरूशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के विवादित फैसले का दुनिया भर में विरोध किया जा रहा है। सैकड़ों फिलिस्तीन प्रदर्शनकारियों की पश्चिमी तट में इजराइल जवानों से झड़पें हुईं। इस दौरान 30 से अधिक फिलिस्तीन नागरिक जख्मी हो गए। ट्रंप के फैसले को चुनौती देते हुए गाजा पट्टी का प्रशासन चला रहे उग्रवादी संगठन हमास के नेता ने नए सैन्य आंदोलन का आह्वान किया। इस दौरान ट्रंप का जमकर विरोध हुआ और प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी और इजराइल झंडे भी जलाए।

कई देशों ने किया समर्थन
इस विरोध-प्रदर्शन के बीच कई देश ऐसे भी हैं जिन्होंने ट्रंप के इस फैसला को सही ठहराया है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ऐतिहासिक फैसले बताते हुए दूसरे देशों से भी इसका अनुसरण करने को कहा। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि ट्रंप का यह कदम अमेरिका को पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की पारंपरिक भूमिका के लिए अयोग्य बनाता है। सऊदी अरब ने ट्रंप के इस कदम को अनुचित और गैर जिम्मेदाराना करार दिया है।

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माना जा रहा है ट्रंप का यह फैसले भारत के लिए भी कई मुश्किलें पैदा कर सकता है। सबसे बड़ी समस्‍या यह भी है कि मौजूदा समय में भारत के अरब देशों के साथ-साथ इजरायल, फलस्‍तीन और अमेरिका से बेहतर संबंध हैं। ऐसे में किसी के खिलाफ भी नहीं जा सकता है। वहीं अमेरिका से बीते कुछ समय में जिस तरह से रिश्‍ते बेहतर हुए हैं उन्‍हें भी नहीं बिगाड़ा जा सकता है। हालांकि भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलिस्तीन पर उसका रुख स्वतंत्र तथा सतत है और उसका नजरिया किसी तीसरे देश से प्रभावित नहीं है

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