वंदे मातरम के 6 अंतरो पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
वंदे मातरम के 6 अंतरों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र सरकार से मांगा जवाब
नई दिल्ली | 28 अक्टूबर 2026 | मंडी हलचल
वंदे मातरम के सभी छह अंतरों को गाने या बजाने की अनिवार्यता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में दायर दो नई याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने गृह मंत्रालय के उन आदेशों को चुनौती दी है, जिनमें निर्धारित अवसरों पर वंदे मातरम के सभी छह अंतरों के गायन या वादन का प्रावधान किया गया है।

क्या छह अंतरों वाला वंदे मातरम अनिवार्य किया जा रहा है?
विवाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के 28 जनवरी और 9 जुलाई 2026 के आदेशों को लेकर है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन आदेशों के जरिए अब तक प्रचलित दो अंतरों वाले वंदे मातरम की जगह छह अंतरों वाले पूर्ण संस्करण को लागू किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि छह अंतरों वाले संस्करण में धार्मिक संदर्भ हैं और इसे अनिवार्य करना धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा संविधान के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों से जुड़े सवाल खड़े करता है।
किन लोगों ने दायर की याचिकाएं?
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं बी.डी. बोरकर और पूर्व आईएएस अधिकारी बालकृष्णन सत्यभामा मावोजी ने दायर की हैं। दोनों ने केंद्र सरकार के आदेशों को चुनौती देते हुए उन्हें रद्द करने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि राष्ट्रीय समारोहों में लंबे समय से दो अंतरों वाले संस्करण का इस्तेमाल होता रहा है। उनके अनुसार, सभी छह अंतरों को अनिवार्य करने से नागरिकों की धार्मिक आस्था और अंतरात्मा की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
ये याचिकाकर्ताओं के तर्क हैं। इन पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है।
क्या वंदे मातरम नहीं गाने पर कार्रवाई होगी?
इससे पहले 22 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने गायक टी.एम. कृष्णा की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा था कि अपनी अंतरात्मा या धार्मिक मान्यताओं के कारण वंदे मातरम गाने से इनकार करने वाले व्यक्ति को दंडित नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने इस संदर्भ में बिजोए इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामले में दिए गए 1986 के फैसले के सिद्धांतों का उल्लेख किया था।
हालांकि, मौजूदा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि गृह मंत्रालय के सभी संबंधित आदेश वैध हैं या नहीं।
अब 30 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों नई याचिकाओं को इसी विषय से संबंधित पहले से लंबित मामले के साथ जोड़ दिया है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। अब केंद्र सरकार के जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।
फिलहाल मुख्य सवाल यही है: क्या निर्धारित सरकारी आयोजनों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों को अनिवार्य करने वाले आदेश संवैधानिक कसौटी पर खरे उतरते हैं? इसका निर्णय सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

