₹14,500 करोड़ की ऊर्जा भंडारण योजना को मंजूरी, देश में बनेंगे बड़े एनर्जी स्टोरेज सिस्टम
92 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य, सौर और पवन ऊर्जा को स्टोर कर जरूरत के समय मिलेगी बिजली; करीब ₹97,600 करोड़ का निवेश प्रस्तावित।
नई दिल्ली। देश में बिजली की उपलब्धता को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने के लिए ₹14,500 करोड़ की वित्तीय सहायता वाली योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देशभर में 92 गीगावॉट-घंटे (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी।

यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू रहेगी। इसका उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर करना और जरूरत के समय उसका उपयोग सुनिश्चित करना है।
तीन तरह की तकनीकों से तैयार होंगे स्टोरेज सिस्टम
योजना के तहत कुल 92 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें:
- 60 GWh क्षमता पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं से विकसित होगी।
- 30 GWh क्षमता बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) से तैयार होगी।
- 2 GWh क्षमता नई और उभरती ऊर्जा भंडारण तकनीकों के जरिए विकसित की जाएगी।
करीब ₹97,600 करोड़ का होगा निवेश
सरकार की ओर से दी जाने वाली ₹14,500 करोड़ की वित्तीय सहायता से इन परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने में मदद मिलेगी। पूरी परियोजना में लगभग ₹97,600 करोड़ के निवेश का अनुमान है।
बैटरी निर्माण में घरेलू कंपनियों को बढ़ावा
योजना के तहत बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं में कम से कम 40 प्रतिशत घरेलू सामग्री का उपयोग अनिवार्य होगा। इससे देश में बैटरी निर्माण और संबंधित उद्योगों को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
क्या होगा आम लोगों को फायदा?
ऊर्जा भंडारण प्रणाली के जरिए दिन में सौर ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखा जा सकेगा और शाम या बिजली की अधिक मांग के समय इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे बिजली आपूर्ति की स्थिरता बढ़ाने, नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने और चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031-32 तक देश की ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता को 411 GWh तक पहुंचाने में मदद करना है।
