छिंदवाड़ा में गौसेवा सम्मान समारोह: गौशाला संचालकों का सम्मेलन, अनुदान और व्यवस्थाओं की समस्याओं पर उठी आवाज
छिंदवाड़ा में गौशाला संचालकों का सम्मेलन, गौसेवकों का हुआ सम्मान; अनुदान और व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याएं उठीं
छिंदवाड़ा। गौसेवा और गोवंश संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छिंदवाड़ा में गौशाला संचालक सम्मेलन एवं गौसेवा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। परासिया रोड स्थित पूजा श्री होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी जिले के गौशाला संचालकों एवं गौसेवकों ने हिस्सा लिया। समारोह में गौसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वहीं, गौशालाओं के संचालन में आ रही समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
अतिथियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
गौ एवं गौशाला उत्थान संघ मध्यप्रदेश, जिला छिंदवाड़ा के सौजन्य से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। समारोह में खंडवा से स्वामी सुखदेव बाबा, देवास से साध्वी कृष्णा दीदी, आगर मालवा से राधेश्याम विश्वकर्मा, झोकर मक्सी से प्रमोद मेहता सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथि मौजूद रहे। इनके अलावा दामोदर भोजने महाराज, नरेंद्र साहू, रामजी किरार, संजीव राऊत, गयाप्रसाद सोनी और सफर जौनपुरी सहित गौसेवा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

‘गौसेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं’
समारोह को संबोधित करते हुए स्वामी सुखदेव बाबा ने गौसेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौसेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं है। गौमाता के संरक्षण और सम्मान के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने गोवंश की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए कहा कि अनेक स्थानों पर गौवंश सड़कों पर भटकने को मजबूर है। उन्होंने सरकार से गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की दिशा में पहल करने की अपील भी की।
गौशालाओं के अनुदान और सुविधाओं का उठा मुद्दा
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम विश्वकर्मा ने गौशाला संचालकों को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन गौशालाओं की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
उन्होंने बताया कि गौशालाओं को मिलने वाली अनुदान राशि में देरी और संचालन से जुड़ी परेशानियों के मुद्दे सरकार के सामने रखे जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गौसेवा को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
विश्वकर्मा ने गौशालाओं में हरे चारे, पर्याप्त पानी, बिजली और गोचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने जैसे विषयों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि गौशालाओं का विकास और वहां रह रहे गोवंश की बेहतर देखभाल संगठन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 3215 गौशालाएं गोसंवर्धन बोर्ड में पंजीकृत होकर अनुदान प्राप्त कर रही हैं। इसके अलावा ऐसी गौशालाओं के पंजीयन के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, जो अभी तक बोर्ड से नहीं जुड़ पाई हैं।
संगठन को मजबूत बनाने पर जोर
प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद मेहता ने संगठन को मजबूत करने और अधिक से अधिक गौशाला संचालकों को इससे जोड़ने की बात कही। उन्होंने गौसेवा से जुड़े लोगों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया।
सम्मेलन में मौजूद अन्य अतिथियों ने भी गोवंश संरक्षण, गौशालाओं के विकास और गौसेवकों के योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के माध्यम से गौसेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और गौशालाओं की समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास करने का संदेश दिया गया।

